
पेट्रोल पंप पर इथेनॉल की बढ़ती हिस्सेदारी की चर्चा आपने जरूर सुनी होगी। लेकिन क्या इसका असर आपकी कार या बाइक के बाद सीधे आपकी ड्रेसिंग टेबल तक पहुंच सकता है? सवाल थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन इसकी वजह परफ्यूम और डियो में इस्तेमाल होने वाला अल्कोहल है। हालांकि फिलहाल ऐसा कोई साफ ट्रेंड सामने नहीं आया है कि इथेनॉल की वजह से परफ्यूम और डियो महंगे हो रहे हैं। असली कहानी थोड़ी अलग है।
परफ्यूम, डियो और बॉडी स्प्रे में अल्कोहल सिर्फ एक सामान्य कच्चा माल नहीं है। यह खुशबू को फैलाने और स्प्रे को तेजी से वाष्पित होने में मदद करता है। इसके लिए मुख्य रूप से Extra Neutral Alcohol (ENA) या डिनेचर्ड स्पिरिट का इस्तेमाल किया जाता है। यहीं से इथेनॉल की कहानी जुड़ती है। अगर फ्यूल इथेनॉल की मांग बढ़ती है और इससे अल्कोहल की दूसरी इंडस्ट्री के लिए उपलब्धता प्रभावित होती है, तो कॉस्मेटिक्स कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका बन सकती है।
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क्योंकि परफ्यूम की कीमत सिर्फ अल्कोहल से तय नहीं होती। फ्रैगरेंस ऑयल, बोतल, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विज्ञापन और टैक्स भी कीमत में बड़ा हिस्सा रखते हैं। इसलिए ENA की कीमत में मामूली बदलाव होने पर कंपनियां तुरंत पूरी लागत ग्राहक पर नहीं डालतीं। खासकर बड़े ब्रांड अपनी कीमतों में बदलाव कई दूसरे कारोबारी पहलुओं को देखकर करते हैं।
अगर भविष्य में ENA की लागत में बड़ी बढ़ोतरी होती है तो उसका असर सभी प्रोडक्ट पर एक जैसा नहीं होगा। मास-मार्केट डियो और बॉडी स्प्रे में अल्कोहल की मात्रा महत्वपूर्ण होती है और इनका मार्जिन भी प्रीमियम परफ्यूम की तुलना में अलग हो सकता है। इसलिए लागत बढ़ने की स्थिति में इन प्रोडक्ट्स पर दबाव पहले दिखाई दे सकता है। इसके उलट महंगे डिजाइनर परफ्यूम की कुल कीमत में अल्कोहल की लागत अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा होती है। इसलिए वहां इसका सीधा असर कम होने की संभावना रहती है।
इस पूरी कहानी का एक अहम पहलू राज्य सरकारों की टैक्स पॉलिसी भी है। इंडस्ट्रियल अल्कोहल को लेकर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ के 8:1 फैसले ने राज्यों की नियामक और कर संबंधी भूमिका को महत्वपूर्ण माना था। ऐसे में अगर किसी राज्य में ENA या संबंधित अल्कोहल पर स्थानीय ड्यूटी या सेस बढ़ता है, तो कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर प्रोडक्ट की कीमतों पर पड़ सकता है।
फिलहाल सिर्फ पेट्रोल में इथेनॉल की बढ़ती हिस्सेदारी को देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि आपका परफ्यूम या डियो महंगा होने वाला है। जब तक ENA की सप्लाई सामान्य रहती है और टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक फ्यूल इथेनॉल और आपकी पसंदीदा खुशबू के बीच सीधा कीमत बढ़ने का रिश्ता नजर नहीं आता।
यानी अभी आपकी ड्रेसिंग टेबल को पेट्रोल में मिल रहे इथेनॉल से घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर ENA की सप्लाई, उसकी कीमत या राज्य टैक्स में बड़ा बदलाव आता है, तब इस कहानी का असर आपकी जेब तक पहुंच सकता है।
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