
Viral Post: बेंगलुरु जैसे महंगे शहर में एक किंडरगार्टन (प्ले-स्कूल) टीचर को सिर्फ 6000 रुपए महीने की सैलरी मिलने की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर निजी स्कूलों की फीस लगातार बढ़ रही है, वहीं शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को बेहद कम वेतन दिया जा रहा है। इस मुद्दे ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था बल्कि निजी स्कूलों के वेतन ढांचे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए पूरा मामला।
यह मामला तब चर्चा में आया जब एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने बताया कि उनकी सिस्टर-इन-लॉ को बेंगलुरु के एक प्ले-स्कूल में शिक्षक की नौकरी मिली है, लेकिन इसके बदले उन्हें हर महीने केवल 6000 रुपए सैलरी ऑफर की गई है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि आखिर इतने कम पैसों में कोई व्यक्ति बेंगलुरु जैसे शहर में अपना खर्च कैसे चला सकता है, जबकि यहां रहने, खाने और आने-जाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। नीचे देखें वायरल पोस्ट-
My sister-in-law just got a job as a playschool/kindergarten teacher and she'll be paid a whopping ₹6,000 per month in Bangalore!
While school fees are skyrocketing, teacher salaries are plummeting.
How on earth can anyone live on under ₹6,000 a month in a metro city?— Mohamed Nowsath (@Md_Nowsath_) July 5, 2026
पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि जब स्कूलों की फीस हर साल बढ़ रही है, तब शिक्षकों को इतना कम वेतन मिलना समझ से परे है। कुछ लोगों का मानना था कि शुरुआती शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करती है, इसलिए किंडरगार्टन टीचर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और उन्हें सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए।
कई यूजर्स ने इस वेतन की तुलना दूसरे पेशों से भी की। एक व्यक्ति ने दावा किया कि कुछ निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों को 18000 रुपए से 20000 रुपए तक शुरुआती वेतन देती हैं, जबकि कई घरेलू सहायकों की कमाई भी इससे अधिक होती है। कुछ लोगों ने सलाह दी कि इतनी कम सैलरी पर नौकरी स्वीकार नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे ऐसे सैलरी स्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलता है।
कुछ प्रतिक्रियाओं में इस मुद्दे को केवल स्कूलों तक सीमित नहीं माना गया। लोगों ने कहा कि देश में कई पेशों में योग्य कर्मचारियों को उनकी मेहनत के मुकाबले बहुत कम वेतन मिलता है। उदाहरण के तौर पर नर्सों का जिक्र करते हुए कहा गया कि भारत में उन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन मिलता है, जबकि विदेशों में इसी पेशे को बेहतर आर्थिक सम्मान मिलता है।
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