बेंगलुरु में किंडरगार्टन टीचर को सिर्फ ₹6000 सैलरी! Viral Post ने प्राइवेट स्कूलों के वेतन पर छेड़ी बहस

Published : Jul 06, 2026, 03:31 PM IST
Bengaluru Kindergarten Teacher Salary Viral Post

सार

Bengaluru Kindergarten Teacher Salary Viral Post: बेंगलुरु में किंडरगार्टन टीचर को 6000 रुपए मंथली सैलरी मिलने की वायरल पोस्ट के बाद प्राइवेट स्कूलों के वेतन पर बहस तेज हो गई है। जानें पूरा मामला और देखें वायरल पोस्ट।

Viral Post: बेंगलुरु जैसे महंगे शहर में एक किंडरगार्टन (प्ले-स्कूल) टीचर को सिर्फ 6000 रुपए महीने की सैलरी मिलने की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर निजी स्कूलों की फीस लगातार बढ़ रही है, वहीं शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को बेहद कम वेतन दिया जा रहा है। इस मुद्दे ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था बल्कि निजी स्कूलों के वेतन ढांचे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए पूरा मामला।

एक पोस्ट से शुरू हुई चर्चा

यह मामला तब चर्चा में आया जब एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने बताया कि उनकी सिस्टर-इन-लॉ को बेंगलुरु के एक प्ले-स्कूल में शिक्षक की नौकरी मिली है, लेकिन इसके बदले उन्हें हर महीने केवल 6000 रुपए सैलरी ऑफर की गई है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि आखिर इतने कम पैसों में कोई व्यक्ति बेंगलुरु जैसे शहर में अपना खर्च कैसे चला सकता है, जबकि यहां रहने, खाने और आने-जाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। नीचे देखें वायरल पोस्ट-

 

 

स्कूल फीस और टीचर की सैलरी पर लोगों ने जताई नाराजगी

पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि जब स्कूलों की फीस हर साल बढ़ रही है, तब शिक्षकों को इतना कम वेतन मिलना समझ से परे है। कुछ लोगों का मानना था कि शुरुआती शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करती है, इसलिए किंडरगार्टन टीचर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और उन्हें सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए।

'घरेलू कामगार से भी कम वेतन' जैसी प्रतिक्रियाएं

कई यूजर्स ने इस वेतन की तुलना दूसरे पेशों से भी की। एक व्यक्ति ने दावा किया कि कुछ निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों को 18000 रुपए से 20000 रुपए तक शुरुआती वेतन देती हैं, जबकि कई घरेलू सहायकों की कमाई भी इससे अधिक होती है। कुछ लोगों ने सलाह दी कि इतनी कम सैलरी पर नौकरी स्वीकार नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे ऐसे सैलरी स्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलता है।

जॉब मार्केट और सैलरी असमानता पर भी हुई चर्चा

कुछ प्रतिक्रियाओं में इस मुद्दे को केवल स्कूलों तक सीमित नहीं माना गया। लोगों ने कहा कि देश में कई पेशों में योग्य कर्मचारियों को उनकी मेहनत के मुकाबले बहुत कम वेतन मिलता है। उदाहरण के तौर पर नर्सों का जिक्र करते हुए कहा गया कि भारत में उन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन मिलता है, जबकि विदेशों में इसी पेशे को बेहतर आर्थिक सम्मान मिलता है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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