Who is IAS Tukaram Mundhe: 21 साल की नौकरी में 25 ट्रांसफर झेल चुके IAS तुकाराम मुंढे अब FDA में ताबड़तोड़ एक्शन से चर्चा में हैं। जानिए उनके करियर, एजुकेशन और सख्त तेवर की वजह। पूरी डिटेल।
Tukaram Mundhe FDA Commissioner: महाराष्ट्र में इन दिनों IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे का नाम सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा में है। वजह है खाद्य सुरक्षा को लेकर उनका सख्त अभियान। 25 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA के आयुक्त का पद संभालने के बाद उनकी टीम ने होटल-रेस्तरां से लेकर दूध, पनीर, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों तक कार्रवाई तेज कर दी। 31 जुलाई तक FDA ने 3,137 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और 165 लाइसेंस निलंबित किए। करीब 55.72 करोड़ रुपये मूल्य के असुरक्षित खाद्य पदार्थ जब्त या नष्ट किए गए। जानिए IAS तुकाराम मुंढे के बारे में रोचक बातें और क्यों हैं चर्चा में।
कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? शुरुआती जीवन और पढ़ाई
तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के जिला परिषद स्कूल से हुई। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने इतिहास में बीए और राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की। दोनों डिग्रियां उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से कीं, जो अब छत्रपति संभाजीनगर में स्थित है।
UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, 2005 बैच में बने IAS
तुकाराम मुंढे ने UPSC Civil Services Examination 2004 में सफलता हासिल की और ऑल इंडिया रैंक 20 प्राप्त की। इसके बाद वह 2005 बैच के IAS अधिकारी बने और उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने का असर उनके प्रशासनिक करियर में भी देखने को मिला। आगे चलकर उन्हें सूखा प्रबंधन, जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों और जनकल्याण से जुड़े काम करने का मौका मिला। सादगी, सीधे अंदाज और नियमों को सख्ती से लागू करने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें बाकी अफसरों से अलग पहचान दी है।
21 साल की नौकरी में 25 तबादले
मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बात उनकी पोस्टिंग हिस्ट्री भी रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब दो दशक से ज्यादा की सेवा में उनका लगभग 25 बार तबादला हो चुका है। इसी वजह से उनकी तुलना कई बार हरियाणा कैडर के पूर्व IAS अधिकारी अशोक खेमका से भी की गई। हालांकि, बार-बार तबादलों के बावजूद उनकी सख्त प्रशासनिक छवि बनी रही।
IAS तुकाराम मुंढे के FDA में आते ही क्यों मचा हड़कंप?
IAS तुकाराम मुंढे की FDA में मौजूदा पारी का सबसे बड़ा पहलू है कार्रवाई का दायरा। निरीक्षण केवल पारंपरिक दुकानों और रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं रहा। दूध और डेयरी उत्पादों से लेकर बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों और क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस तक जांच पहुंची है। FDA ने गुटखा और पान मसाला के अवैध कारोबार पर भी कार्रवाई तेज की है। अगस्त में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को एक पान मसाला इलायची विज्ञापन के संबंध में नोटिस दिए जाने से मामला और सुर्खियों में आ गया।
‘सिंघम IAS’ वाली छवि के पीछे क्या है?
IAS तुकाराम मुंढे को ‘सिंघम IAS’ कहे जाने की वजह उनकी बेबाक और कड़े फैसले लेने वाली छवि है। लेकिन उनकी मौजूदा पारी का दूसरा पहलू भी सामने आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में पुणे की एक मिठाई की दुकान का लाइसेंस निलंबित रखने के मामले में FDA को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह बहस भी तेज हुई है कि खाद्य सुरक्षा के लिए सख्ती जरूरी है, लेकिन कार्रवाई प्रक्रिया और अनुपात के दायरे में रहनी चाहिए। मुंढे ने कहा है कि FDA ने यह कदम जनहित में उठाया था और आदेश मिलने के बाद कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। यही वजह है कि तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक ‘सख्त IAS अफसर’ की कहानी नहीं रह गई है। यह अब खाद्य सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कड़े Enforcement (प्रवर्तन) बनाम कारोबारी राहत की उस बहस का हिस्सा है, जिसका असर सीधे आम ग्राहक की थाली और सेहत पर पड़ता है।
