
CBSE Result Controversy: सीबीएसई 12वीं रिजल्ट आने के बाद लाखों छात्र कॉलेज और यूनिवर्सिटी एडमिशन की तैयारी में जुट जाते हैं। लेकिन इस बार रिजल्ट और डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम को लेकर उठे सवालों ने कई छात्रों की टेंशन बढ़ा दी है। कुछ छात्रों ने स्कैन की गई आंसर शीट में दिक्कतों की शिकायत की, तो कुछ ने री-इवैल्यूएशन प्रॉसेस को लेकर सवाल उठाए। ऐसे में दिमाग में चौबीसों घंटे एक ही सवाल घूम रहा है, 'CBSE के इस कॉपी चेकिंग विवाद और री-चेकिंग की देरी के चक्कर में कहीं मेरे हाथ से अच्छे कॉलेज की सीट न निकल जाए?' अगर आप या आपके बच्चे भी इस समय इसी तनाव से गुजर रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है। यहां जानिए सीबीएसई के इस बड़े बवाल के बीच आप अपनी कॉलेज की सीट कैसे सेफ (Block) रख सकते हैं।
इस मामले में एक्शन लेते हुए केंद्र सरकार ने आज 2 जून को सीबीएसई के चेयरमैन और सेक्रेटरी दोनों का ट्रांसफर (Transfer) कर दिया है। इसके साथ ही, डिजिटल कॉपी चेकिंग करने वाले OSM (On-Screen Marking) सॉफ्टवेयर के ठेके (Procurement) की जांच के लिए एक बड़ी कमेटी बैठा दी है।
जब छात्रों ने रिजल्ट के बाद अपनी स्कैन कॉपियां मंगवाईं, तो कई कॉपियों में पेज गायब थे और कुछ बिल्कुल धुंधली थीं। जिस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉपियां चेक हुईं, उसके टेंडर और साइबर सिक्योरिटी पर बड़े सवाल उठे हैं। री-इवैल्यूएशन (दोबारा जांच) की सर्विस में बहुत ज्यादा देरी हो रही है, जिससे छात्र परेशान हैं। हालांकि, सीबीएसई ने कॉपियों की शिकायत के लिए आखिरी तारीख (Deadline) आगे बढ़ा दी है और कहा है कि हर छात्र की समस्या को ठीक किया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो जस का तस है, जब तक नंबर सुधरेंगे, तब तक कॉलेज की सीटें भर गईं तो क्या होगा?
कई छात्र सोच रहे हैं कि पहले रीचेकिंग या री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट आ जाए, उसके बाद कॉलेज में अप्लाई करेंगे। यहीं पर सबसे बड़ा रिस्क है। देश की कई यूनिवर्सिटीज और कॉलेज एडमिशन की समय सीमा तय करके चलती हैं। अगर आपने आवेदन ही नहीं किया, तो बाद में नंबर बढ़ने के बावजूद सीट हाथ से निकल सकती है। इसलिए पहला नियम है कि एडमिशन प्रॉसेस कभी भी रोकना नहीं है।
1. कॉलेज फॉर्म में अंडरटेकिंग और प्रोविजनल ऑप्शन का इस्तेमाल करें
भारत की ज्यादातर बड़ी यूनिवर्सिटीज (जैसे DU, BHU या स्टेट यूनिवर्सिटीज) को पता होता है कि बोर्ड रिजल्ट्स में री-चेकिंग का काम चलता है। जब आप यूनिवर्सिटी का एडमिशन फॉर्म भरें, तो वहां अपने मौजूदा मार्क्स भर दें, लेकिन साथ में री-चेकिंग की रसीद या एप्लीकेशन नंबर भी अटैच करें। कई कॉलेज एडमिशन के वक्त एक सहमति पत्र (Undertaking Form) जमा करने की छूट देते हैं। इसमें आप लिख कर दे सकते हैं कि 'मेरा री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट आते ही मैं नए मार्क्स सबमिट कर दूंगा।' इससे आपका फॉर्म रिजेक्ट नहीं होगा और एडमिशन प्रोविजनल (अस्थायी) तौर पर पक्का हो जाएगा।
2. UGC के फीस रिफंड नियम का फायदा उठाएं
अगर आपको डर है कि सीबीएसई के नंबर आने में बहुत ज्यादा देर हो जाएगी, तो आप किसी अच्छे प्राइवेट कॉलेज या अल्टरनेटिव यूनिवर्सिटी में अपनी सीट सेफ कर सकते हैं। यूजीसी का एक बहुत सख्त नियम है कि अगर कोई छात्र किसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने के बाद अपनी सीट कैंसिल कराता है, तो एक तय समय सीमा के अंदर कॉलेज को उसकी 100% फीस वापस करनी होगी। आप एक बैकअप कॉलेज में सीट ब्लॉक कर लीजिए। जैसे ही सीबीएसई से आपके नंबर सुधर जाएं और आपको आपका मनपसंद सरकारी कॉलेज मिल जाए, आप पुराने कॉलेज से अपना पूरा पैसा वापस ले सकते हैं।
3. CUET और एंट्रेंस एग्जाम के स्कोर को ढाल बनाएं
अगर आप सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में एडमिशन ले रहे हैं, तो याद रखें कि वहां सारा खेल CUET (Common University Entrance Test) के नंबरों पर टिका है, न कि सिर्फ 12वीं के मार्क्स पर। सीबीएसई विवाद की टेंशन को अपने एंट्रेंस एग्जाम या काउंसलिंग पर हावी न होने दें। बोर्ड के नंबर सिर्फ एलिजिबिलिटी (न्यूनतम योग्यता) के लिए जरूरी होते हैं। अगर आपके बोर्ड में 5-10 नंबर कम भी रह गए हैं, तो भी आप अपनी काउंसलिंग की प्रक्रिया में पूरे आत्मविश्वास के साथ भाग लें।
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