
CBSE New Rules: CBSE के लाखों स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) को लेकर पैदा हुए कन्फ्यूजन अब दूर हो गया है। 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ रहे उन छात्रों को अपनी फॉरेन लैंग्वेज (Foreign Language) नहीं छोड़नी होगी, जिन्होंने पहले से दो विदेशी लैंग्वेज चुनी हुई हैं। हालांकि, राहत के साथ एक नया सवाल भी सामने आया है। नई एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के तहत छात्रों को स्किल एजुकेशन (Skill Education) पर ज्यादा फोकस करना होगा। उन्हें स्कूल में 110 घंटे का एक खास मॉड्यूल पूरा करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है...
हाल ही में CBSE के एक निर्देश के बाद कई स्कूलों और पैरेंट्स को चिंता होने लगी थी कि जो छात्र सालों से फ्रेंच, जर्मन और जापानीज (Japanese) या दूसरी फॉरेन लैंग्वेज पढ़ रहे हैं, उन्हें बीच में ही एक भारतीय भाषा चुननी पड़ सकती है, लेकिन अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया है कि ऐसा नहीं होगा। यानी जो छात्र अभी 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे हैं और दो फॉरेन लैंग्वेज के साथ पढ़ाई कर रहे हैं, वे 10वीं तक उसी कॉम्बिनेशन को जारी रख सकेंगे। इससे लाखों छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
नया सिस्टम आने वाले बैचों पर लागू होगा। यानी जो छात्र आने वाले समय में 6वीं कक्षा में एडमिशन लेंगे, उन्हें नई भाषा नीति के अनुसार तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। इस तरह सरकार नई व्यवस्था को आगे बढ़ाएगी, लेकिन पुराने छात्रों पर इसे जबरन लागू नहीं करेगी।
सीबीएसई अब छात्रों को किताबी कीड़ा बनाने के बजाय उन्हें प्रैक्टिकल स्किल्स (हुनर) सिखाने पर बड़ा फोकस कर रहा है। इसके लिए वोकेशनल एजुकेशन को अनिवार्य किया जा रहा है। नियम के मुताबिक, कक्षा 6 से 8 के छात्रों को हर साल स्कूल में 110 घंटे का स्किल मॉड्यूल (Skill Module) पूरा करना जरूरी होगा। इसमें बच्चों को कोडिंग, कारपेंट्री, या अन्य कोई भी प्रैक्टिकल हुनर सिखाया जाएगा। कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए एक स्किल सब्जेक्ट (Skill Subject) को पूरी तरह अनिवार्य (Mandatory) यानी कंपल्सरी है। सीबीएसई के अधिकारी अभी इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि क्या 10वीं क्लास तक इस अनिवार्य वोकेशनल सब्जेक्ट की जगह छात्रों को फॉरेन लैंग्वेज चुनने की छूट दी जा सकती है या नहीं। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी आखिरी मुहर लगना बाकी है।
डिजिटल स्किल्स
कोडिंग बेसिक्स
आंत्रप्रेन्योरशिप
फाइनेंशियल लिटरेसी
कम्युनिकेशन स्किल्स
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
वोकेशनल ट्रेनिंग
CBSE के अधिकारी इस संभावना पर भी विचार कर रहे हैं कि 10वीं तक फॉरेन लैंग्वेज को अनिवार्य स्किल सब्जेक्ट के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जा सके। हालांकि, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और चर्चा जारी है।
फिलहाल नहीं। शिक्षा मंत्री की ओर से स्थिति साफ किए जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि CBSE जल्द ही संशोधित आदेश जारी करेगा। यानी अभी छात्रों और स्कूलों को बोर्ड की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा।
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