
US Visa Anxiety Story: अमेरिका में काम कर रहे हजारों विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए वीजा नियम हमेशा से टेंशन का बड़ा कारण रहे हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है, जहां अमेजन में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनयर काम करने वाला एक चीनी युवक अमेरिका छोड़ने का फैसला कर चुका है। सालाना करीब 1.80 लाख डॉलर यानी की लगभग 1.5 करोड़ रुपए की मोटी सैलरी कमाने वाला यह इंजीनियर कहता है कि लगातार वीजा से जुड़ी अनिश्चितता और नई नीतियों ने उसकी जिदंगी को इतना मुश्किल बना दिया है कि अब उसे अमेरिका में अपना करियर जारी न रखने का बड़ा कदम उठा लिया है।
यह इंजीनियर अमेरिका में ओपीटी वर्क परमिट पर काम कर रहा था और उसके पास 18 महीने का समय अभी बाकी भी था। इसके अलावा, उसे H-1B वीजा लॉटरी में एक और कोशिश करने का हक था। लेकिन हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर करीब 83 लाख रुपए की एक्स्ट्रा फीस लगाने के फैसले ने उसकी चिंता और बढ़ा दी। 3 साल तक की अनिश्चितता झेलने के बाद आखिरकार उसने अमेरिका छोड़ने का मन बना लिया।
अपनी कहानी इंस्ट्राग्राम पर शेयर करते हुए इस इंजीनियर ने बताया कि अच्छे पैकेज पर जॉब होने के बावजूद वह लगातार डर और तनाव में जी रहा था। उसने कहा- मैं यहां आया था फाइनेंशियल फ्रीडम और सुकून की तलाश में, लेकिन हर दिन डर में जीना पड़ा। कभी स्टूडेंट वीजा, कभी ओपीटी, फिर H-1B और उसके बाद ग्रीन कार्ड... यह सब एक न खत्म होने वाला चक्र है। जिंदगी में एक पल भी चैन से सांस नहीं ले पाया। नीचे देखें वीडियो
अमेरिका में नौकरी छोड़ने के बाद अब यह इंजीनियर एक अमेरिकी कंपनी रजिस्टर कर विदेश से ही उसे चलाने की तैयारी कर रहा है। उसका मानना है कि इस तरह वह अमेरिकी सैलरी तो कमाएगा, लेकिन साथ ही विदेश में बेहतर हेल्थकेयर, कम खर्च और ज्यादा आजादी का मजा भी ले सकेगा। उसने अपनी पोस्ट में लिखा- 'नई अमेरिकन ड्रीम यही है- अमेरिका से कमाई करो और दुनिया में कहीं भी रहो। FAANG कंपनी के कर्मचारी से ग्लोबल फाउंडर बनने का सफर मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा और सही फैसला होगा।
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इस घटना ने फिर से उस चिंता को सामने ला दिया है, जिसका सामना हजारों इंटरनेशनल स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स रोज कर रहे हैं। H-1B वीजा पर ज्यादा निर्भर रहने वाले भारतीय आईटी सेक्टर पर भी इस फैसले का सीधा असर पड़ सता है। वीजा फीस बढ़ने से कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और कई कंपनियां अमेरिका से अपना ध्यान हटाकर दूसरे देशों की ओर रुख कर सकती हैं।
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