
Lal Bahadur Shastri Death Anniversary 2026 Date: 11 जनवरी को हर साल भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी जाती है। हर भारतीय के लिए लाल बहादुर शास्त्री सिर्फ एक प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि देशभक्ति, सादगी और दृढ़ नेतृत्व का प्रतीक भी थे। उनका जीवन आज भी ईमानदारी, त्याग और साहस की सीख देता है। उन्होंने सीमित संसाधनों में भी देश को आत्मविश्वास और एकजुटता का मार्ग दिखाया। हर साल 11 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है। शास्त्री जी ने भारत-पाक युद्ध में दृढ़ नेतृत्व और रणनीति से देश को विजय दिलाई। उनके विचार और “जय जवान, जय किसान” का अमर नारा आज भी युवाओं और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जानिए लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, उपलब्धियों और उनके सादगी भरे नेतृत्व के बारे में रोचक और प्रेरक बातें।
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम मुंशी चंद्र प्रसाद और माता का नाम रामदुलारी था। पिता का जल्दी निधन होने के कारण शास्त्री जी अपने नाना के घर पले-बढ़े। उन्होंने शिक्षा के लिए काशी विद्यापीठ से पढ़ाई की और वहीं से उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि मिली। वर्ष 1928 में उन्होंने ललिता देवी से विवाह किया और उनके छह संतानें हुईं।
लाल बहादुर शास्त्री ने मात्र 16 साल की उम्र में असहयोग आंदोलन में भाग लिया और अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उन्होंने 1921, 1930 और 1942 के स्वतंत्रता आंदोलनों में हिस्सा लिया और कुल नौ साल जेल में बिताए। शास्त्री जी का जीवन हमेशा गांधीवादी सिद्धांतों और अहिंसा के मूल्यों पर आधारित रहा।
लाल बहादुर शास्त्री 1952 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और रेल मंत्री बने। 1955 में अराह रेल हादसे के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे गृह मंत्री और वाणिज्य मंत्री भी रहे। 9 जून 1964 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाला नेहरू के बाद शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
11 जनवरी 1966 को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ। बताया गया कि हृदयाघात हुआ, लेकिन मौत की परिस्थितियां अब भी रहस्य बनी हुई हैं। उनकी बॉडी का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ और शरीर पर नीले निशान पाए गए। जहर की संभावना पर जांच आयोग भी बना, लेकिन सच्चाई सामने नहीं आई।
लाल बहादुर शास्त्री हमेशा सादगी, त्याग और देशभक्ति के प्रतीक रहेंगे। छोटे कद के थे, लेकिन उनका दिल बड़ा था। उन्होंने किसानों और सैनिकों का सम्मान करना सिखाया। आज भी उनकी शिक्षाएं प्रेरणादायक हैं। विजय घाट स्मारक उनकी याद में बनाया गया, जहां देशभर में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।
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