
Sultan Haitham Bin Tariq Profile: ओमान के शासक सुल्तान हैथम बिन तारिक एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। वजह है, गुरुवार, 18 दिसंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली अहम मुलाकात। मस्कट में होने जा रही यह बैठक सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें क्षेत्रीय स्थिरता, कूटनीति और इस्लामिक दुनिया में मध्यस्थ की भूमिका जैसे बड़े मुद्दे भी शामिल हैं। 70 वर्षीय सुल्तान हैथम बिन तारिक ऐसे शासक हैं, जिनके पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सुपरयाट है, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ शाही वैभव से नहीं, बल्कि शांत, संतुलित और आधुनिक शासन शैली से बनती है। जानिए ओमान के शासक सुल्तान हैथम बिन तारिक का शाही वैभव, एजुकेशन, फैमिली, पत्नी और बच्चों के बारे में।
ओमान में पिछले करीब 281 सालों से अल सईद परिवार सत्ता संभालता आ रहा है। सुल्तान हैथम इसी वंश के शासक हैं, लेकिन वे पारंपरिक राजशाही के दायरे में सिमटे रहने वाले शासक नहीं हैं। सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद का जन्म 11 अक्टूबर 1955 को मस्कट में हुआ था। उनके पिता तारिक बिन तैयमूर आधुनिक शिक्षा के समर्थक थे, इसलिए हैथम की पढ़ाई भी पारंपरिक सीमाओं से बाहर हुई। सुल्तान हैथम ने अपनी शुरुआती शिक्षा मस्कट के सईदिया स्कूल से की। इसके बाद उन्हें लेबनान के ब्रूमाना हाई स्कूल भेजा गया। 1972 में वे ब्रिटेन चले गए, जहां उन्होंने सेकेंडरी और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पेम्ब्रोक कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की, जिसने उनकी सोच को अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण दिया।
ओमान में सुल्तान केवल शासक नहीं होते, बल्कि देश के सर्वोच्च नेता और सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर भी होते हैं। उनका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य माना जाता है। सुल्तान का आदेश अंतिम होता है और वे राष्ट्रीय एकता के प्रतीक माने जाते हैं। 11 जनवरी 2020 को सुल्तान हैथम ने ओमान की सत्ता संभाली। यह सत्ता परिवर्तन बेहद शांतिपूर्ण रहा और पूरी दुनिया ने इसकी सराहना की। अपने पहले भाषण में उन्होंने साफ कहा कि वे सुल्तान काबूस की नीतियों और विजन को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही, ओमान की विदेश नीति शांति, संतुलन और गैर-हस्तक्षेप पर आधारित रहेगी। सत्ता संभालने से पहले सुल्तान हैथम ने विदेश मंत्रालय में काम करते हुए कूटनीति को करीब से समझा और बाद में सेक्रेटरी जनरल बने। करीब 18 साल तक वे संस्कृति और विरासत मंत्री रहे, जहां उन्होंने ओमान की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत किया। वे ‘ओमान विजन 2040’ की मुख्य समिति के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
सुल्तान हैथम खेलों के बड़े समर्थक रहे हैं। वे 1983 से 1986 तक ओमान फुटबॉल एसोसिएशन के पहले चेयरमैन रहे। इसी दौरान ओमान में फुटबॉल ढांचे को मजबूती मिली। उनके कार्यकाल में ओमान ने गल्फ कप का आयोजन किया और 2010 में एशियन बीच गेम्स की आयोजन समिति की अध्यक्षता भी उन्होंने की।
सुल्तान हैथम का नाम तब भी चर्चा में आता है, जब बात शाही वैभव की होती है। वे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सुपरयाट ‘अल सईद’ के मालिक हैं। करीब 164 मीटर लंबी यह याट लग्जरी सुविधाओं से लैस है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 4500 करोड़ रुपये बताई जाती है। इस याट के रखरखाव पर शाही परिवार हर साल लगभग 451 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके अलावा, ओमान के शाही बेड़े में 130 साल पुरानी भाप से चलने वाली दुनिया की सबसे पुरानी फेरी भी शामिल है, जो इतिहास और परंपरा से उनके जुड़ाव को दिखाती है। शाही ठाठ के बावजूद सुल्तान हैथम का निजी जीवन काफी सादा माना जाता है। ओमान में आज भी शाही परंपराएं जीवित हैं। खास मौकों पर शाही रसोई में 48 घंटे तक लगातार भोजन पकाया जाता है।ओमान के शासक को ‘कस्टोडियन’ यानी संरक्षक कहा जाता है। यहां हजार से ज्यादा घोड़ों का शाही अस्तबल और ऊंटों की 25 से अधिक नस्लें मौजूद हैं, जो ओमान की विरासत को दर्शाती हैं।
सुल्तान हैथम अल बु सईद वंश से आते हैं और दिवंगत सुल्तान काबूस के चचेरे भाई थे। उनकी पत्नी हिज हाईनेस सैय्यदा अहद बिंत अब्दुल्लाह बिन हमद अल बु सईदिया हैं। उनका जन्म मस्कट गवर्नरेट में हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं और दोनों ओर से उनका वंश इमाम अहमद बिन सईद अल बु सईदी से जुड़ा है, जो अल बु सईद राज्य के संस्थापक थे। सैय्यदा अहद सामाजिक और मानवीय कार्यों में काफी सक्रिय हैं। वे खासतौर पर परिवार कल्याण, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण पर काम करती हैं। सुल्तान हैथम और सैय्यदा अहद के चार बच्चे हैं। सैय्यद थयाजिन बिन हैथम बिन तारिक अल सईद, संस्कृति, खेल और युवा मामलों के मंत्री और सुल्तान के बड़े बेटे हैं। उसके बाद सैय्यद बिलारब बिन हैथम बिन तारिक अल सईद, सैय्यदा थुराया बिंत हैथम बिन तारिक अल सईद और सैय्यदा उमैमा बिंत हैथम बिन तारिक अल सईद हैं।
अपने लंबे करियर में सुल्तान हैथम को कई बड़े सम्मान और अलंकरण मिले हैं। सबसे प्रमुख सम्मान ऑर्डर ऑफ अल-रुसूख (स्थिरता) रहा, जो उन्हें नवंबर 2010 में दिवंगत सुल्तान काबूस द्वारा दिया गया। इसके अलावा, मार्च 2001 में ऑस्ट्रिया सरकार ने उन्हें सेवा सम्मान प्रदान किया। दिसंबर 2006 में उन्हें सऊदी अरब का किंग अब्दुल अजीज सैश (फर्स्ट क्लास) मिला। नवंबर 2010 में ब्रिटेन ने उन्हें रॉयल विक्टोरियन ऑर्डर का ऑनरेरी नाइट ग्रैंड क्रॉस प्रदान किया।
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