
कहते हैं जहाँ सरस्वती होती है वहाँ लक्ष्मी नहीं होती। इसी के चलते कई प्रतिभाशाली युवा आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। कर्ज लेकर मुसीबत में फंस जाते हैं। बैंकों से ऊँची ब्याज दरों पर कर्ज लेकर उसे चुकाने में असमर्थ होकर दुःख झेलते हैं। यही कारण है कि कई गरीब और मध्यम वर्गीय लोग उच्च शिक्षा को सपना ही समझकर निराश हो जाते हैं। ऐसे लोगों के लिए अब केंद्र सरकार ने एक खुशखबरी दी है।
आज विद्यालक्ष्मी योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। भारत के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु पीएम विद्यालक्ष्मी योजना शुरू की गई है। किसी भी विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान में सीट मिलने के बाद, छात्रों को आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित न रहना पड़े, इसी उद्देश्य से इस योजना को लागू किया गया है। यह योजना शिक्षा ऋण को आसान बनाएगी। भारत या विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को आर्थिक मदद दी जाएगी। आठ लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले छात्रों को तीन प्रतिशत ब्याज दर पर 10 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा।
इस योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थान में प्रवेश पाने वाला कोई भी छात्र बिना किसी गारंटी या जमानत के बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त कर सकता है। यह ट्यूशन फीस और अन्य खर्चों की पूरी राशि को कवर करेगा। इस बारे में आज केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी। देश के 860 उच्च गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षा ऋण प्रदान किया जाएगा। इसके तहत हर साल 22 लाख से ज्यादा छात्रों को ऋण सुविधा मिलेगी।
इसका लाभ उठाकर युवा अपने सपनों को साकार कर सकेंगे। अब उच्च शिक्षा नहीं मिल पाएगी, यह चिंता युवाओं से दूर हो जाएगी, ऐसा केंद्र का कहना है।
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