
Russia Visa Boom 2025: आज के समय में जब अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे बड़े देशों में इमीग्रेशन के रास्ते धीरे-धीरे सख्त होते जा रहे हैं, वहीं रूस एक नया और बड़ा विकल्प बनकर सामने आ रहा है। रूस में इंडस्ट्रीज को तेजी से वर्कफोर्स की कमी झेलनी पड़ रही है, चाहे वह कंस्ट्रक्शन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रीज हों या फिर हैवी मशीनरी प्लांट। इस कमी को पूरा करने के लिए अब रूसी कंपनियां सीधे भारत की तरफ रुख कर रही हैं और बड़ी संख्या में भारतीय टैलेंट को नौकरी पर रख रही हैं। जिसकी वजह से भारतीय प्रोफेशनल्स खास तौर पर वर्कर्स अब मास्को की ओर रूख कर रहे हैं। यही वजह है कि रूस के वर्क वीजा की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसकी वजह से भारत एक नया कॉन्सुलेट जनरल भी खोल रहा है। जानिए पूरी डिटेल।
भारत के रूस में राजदूत विनय कुमार के मुताबिक, हाल के महीनों में भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इतना ही नहीं, इसके चलते कॉन्सुलर सर्विसेज पर भी दबाव बढ़ गया है क्योंकि वीजा और डॉक्यूमेंटेशन का काम अब पहले से कहीं ज्यादा हो गया है। विनय कुमार ने बताया कि रूस में अभी बड़े स्तर पर मैनपावर की जरूरत है और भारत के पास स्किल्ड लोग हैं। इसी कारण कंपनियां भारतीयों को हायर कर रही हैं, लेकिन यह सब रूस के कानून और क्वोटा सिस्टम के हिसाब से हो रहा है। रूस का लेबर मंत्रालय मानता है कि 2030 तक देश को लगभग 3.1 मिलियन वर्कर्स की कमी झेलनी पड़ेगी। इस गैप को पूरा करने के लिए सरकार ने फैसला लिया है कि 2025 से विदेशी कर्मचारियों के लिए कोटा 1.5 गुना बढ़ाया जाएगा, जिससे करीब 2.3 लाख प्रोफेशनल्स को नौकरी के मौके मिलेंगे।
साल 2024 में पहला बैच भारतीय वर्कर्स का रूस पहुंचा था। शुरुआत हुई कालिनिनग्राद के जा रोडिनू फिश प्रोसेसिंग प्लांट से, जहां स्टाफ की भारी कमी थी। इसके बाद से भारतीय वर्कर्स का रूस में आना लगातार जारी है। उरल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख आंद्रे बसीडिन का कहना है कि 2025 के आखिर तक करीब 10 लाख भारतीय विशेषज्ञ रूस में काम करने लगेंगे, जिनमें बड़ी संख्या में Sverdlovsk क्षेत्र में नौकरी पाएंगे। इसी बढ़ती डिमांड को देखते हुए भारत एक नया कॉन्सुलेट जनरल येकातेरिनबर्ग, Sverdlovsk की राजधानी में खोल रहा है, ताकि वीजा और कांसुलर सेवाएं आसानी से मिल सकें। बता दें कि Sverdlovsk रूस का बड़ा इंडस्ट्रियल हब है। यहां की फैक्ट्रियां जैसे Uralmash और Ural Wagon Zavod, जो T-90 टैंक बनाने के लिए मशहूर हैं, लेबर की कमी झेल रही हैं। इसकी वजह है कि बहुत से स्थानीय वर्कर्स मिलिट्री ड्यूटी पर भेज दिए गए हैं और युवा पीढ़ी अब इंडस्ट्रियल जॉब्स में कम दिलचस्पी ले रही है।
शुरुआत में भारतीय वर्कर्स को ज्यादातर कंस्ट्रक्शन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में रखा गया। लेकिन अब डिमांड धीरे-धीरे हाई-टेक और एडवांस्ड सेक्टर्स में बढ़ रही है। राजदूत विनय कुमार बताते हैं पहले ज्यादातर लोग कंस्ट्रक्शन और टेक्सटाइल में गए, लेकिन अब मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में भी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। इस बदलाव से इंजीनियर्स, टेक्निशियंस और अन्य प्रोफेशनल्स के लिए इंटरनेशनल लेवल पर काम करने का बड़ा मौका खुल रहा है।
रूस अलग-अलग तरह के वर्क वीजा ऑफर करता है, जैसे:
नौकरी की बढ़ती मांग के बीच कई फर्जी एजेंट्स भी एक्टिव हो गए हैं। भारतीय एम्बेसी, मॉस्को ने चेतावनी दी है कि कई एजेंट्स टूरिस्ट या बिजनेस वीजा पर ले जाकर लोगों को धोखा दे रहे हैं, जबकि इन वीजा पर रूस में काम करना पूरी तरह गैरकानूनी है। एम्बेसी ने साफ कहा है कि ऐसे वीजा को वर्क परमिट में बदला नहीं जा सकता, इसलिए किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले अच्छी तरह जांच-पड़ताल करें।
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फिलहाल रूस में करीब 14,000 भारतीय रह रहे हैं, जिनमें से लगभग 1,500 अफगान मूल के भारतीय भी शामिल हैं। इस कम्युनिटी में वर्कर्स, प्रोफेशनल्स और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद हैं। करीब 4,500 भारतीय छात्र रूसी यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत मेडिकल पढ़ रहे हैं। इसके अलावा स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग, एरोनॉटिकल डिजाइन, कंप्यूटर साइंस, एग्रीकल्चर, ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी और बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई भी कर रहे हैं। इस तरह रूस में भारतीय वर्कर्स और स्टूडेंट्स के लिए मौकों के नए दरवाजे खुल रहे हैं। आने वाले सालों में यह ट्रेंड और भी तेज होगा, क्योंकि रूस को बड़ी संख्या में स्किल्ड और अनस्किल्ड दोनों तरह के लोगों की जरूरत है।
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