Savitribai Phule Jayanti Speech in Hindi: सावित्रीबाई फुले जयंती पर यहां से लें 2–5 मिनट के बेस्ट भाषण आइडिया

Published : Jan 03, 2026, 11:19 AM ISTUpdated : Jan 03, 2026, 11:20 AM IST
Savitribai Phule Jayanti Bhashan Hindi

सार

Savitribai Phule Jayanti Speech in Hindi: 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले जयंती पर छात्र छोटे और लंबे भाषण दे सकते हैं। वे भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने लड़कियों के स्कूल खोले और समाज सुधार किया। देखें सावित्रीबाई फूले जयंती भाषण पर भाषण।

DID YOU KNOW ?
​सशक्तिकरण की मिसाल
सावित्रीबाई फुले जब स्कूल जातीं, तो लोगों द्वारा पत्थर और कीचड़ फेंके जाते थे, फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लड़कियों को पढ़ाना जारी रखा।

Savitribai Phule Jayanti Bhashan In Hindi: आज हम एक ऐसी महान महिला सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहे हैं, जिन्होंने शिक्षा और साहस से समाज में बदलाव लाया। सावित्रीबाई फुले, भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने लड़कियों के लिए स्कूल खोले और नारी शिक्षा तथा समानता की मिसाल पेश की। सावित्रीबाई फुले जयंती पर स्कूल, कॉलेज भाषण प्रतियोगिता के लिए शॉर्ट और लॉन्ग स्पीच आइडिया यहां से लें।

सावित्रीबाई फुले की जयंती पर 2 मिनट का छोटा भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्यजी, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों!

आज हम सावित्रीबाई फुले की जयंती पर एकत्र हुए हैं। वे भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं। 1848 में उन्होंने पुणे में लड़कियों का पहला स्कूल खोला। समाज के विरोध और मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा का दीप जलाया। जैसा कि उन्होंने कहा है, "शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा।" आइए, हम भी संकल्प लें कि शिक्षा से हम समाज बदलेंगे और अपने जीवन को उज्जवल बनाएंगे। सावित्रीबाई फुले अमर रहें!

सावित्रीबाई फुले की जयंती पर 5 मिनट का लंबा भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों!

आज हम भारत की महान शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहे हैं। सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ। केवल 9 साल की उम्र में उनका विवाह हुआ, और उनके पति ज्योतिराव फुले ने उन्हें पढ़ाया और शिक्षिका बनाया।

1848 में उन्होंने पुणे के भिडेवाड़ा में लड़कियों का पहला स्कूल खोला, जहां सभी जातियों की लड़कियों को पढ़ाया गया। रास्ते में उन्हें अपमान, विरोध और गंदगी झेलनी पड़ी, लेकिन वे कभी नहीं हारी। उन्होंने कहा था, "अज्ञान सबसे बड़ा दुश्मन है।" यही सोच उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देती रही।

सावित्रीबाई फुले ने न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में काम किया, बल्कि बाल विवाह, सती प्रथा और छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने विधवाओं के लिए आश्रय गृह बनाए और नवजात कन्याओं के लिए सुरक्षित घर खोले। 1897 में प्लेग महामारी के दौरान बीमारों की सेवा करते हुए उनका निधन हो गया।

वे कवयित्री भी थीं। उनकी कविता "शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा" आज भी हमें प्रेरित करती है। उनका संदेश स्पष्ट है "अगर लड़कियां पढ़ेंगी, तो देश आगे बढ़ेगा।" आइए, हम सावित्रीबाई फुले की तरह शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के लिए खुद को समर्पित करें। उनका सपना पूरा करें और समाज को बेहतर बनाएं।

जय हिंद!

PREV
AT
About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
Read more Articles on

Recommended Stories

Savitribai Phule Jayanti Essay In Hindi: भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले पर दमदार निबंध
Savitribai Phule Jayanti 2026: हर भारतीय को जाननी चाहिए सावित्रीबाई फुले से जुड़ी ये 10 अहम बातें