Savitribai Phule Jayanti 2026: हर भारतीय को जाननी चाहिए सावित्रीबाई फुले से जुड़ी ये 10 अहम बातें

Published : Jan 03, 2026, 10:29 AM IST
Savitribai Phule Jayanti 2026

सार

Savitribai Phule Jayanti 2026 पर जानिए सावित्रीबाई फुले का प्रेरणादायक जीवन, भारत की पहली महिला शिक्षिका बनने का संघर्ष, शिक्षा और महिला अधिकारों के लिए उनका योगदान और उनसे जुड़े 10 रोचक फैक्ट्स।

Savitribai Phule First Woman Teacher India: भारत के सामाजिक इतिहास में सावित्रीबाई फुले का नाम सम्मान और साहस का प्रतीक है। शिक्षा, महिला अधिकार और जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ उन्होंने जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रेरणा देता है। सावित्रीबाई फुले जयंती 2026 के मौके पर जानिए उनसे जुड़े 10 ऐसे फैक्ट्स, जो हर भारतीय को जरूर जानने चाहिए।

कौन थीं सावित्रीबाई फुले?

सावित्रीबाई फुले 19वीं सदी की महान समाज सुधारक, शिक्षाविद और भारत की पहली महिला शिक्षिका मानी जाती हैं। उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ था। वे माली समुदाय से थीं, जिसे आज पिछड़ा वर्ग माना जाता है।

कम उम्र में हुई शादी

सावित्रीबाई फुले की शादी महज 9 साल की उम्र में 13 साल के ज्योतिराव फुले से हुई। उस दौर में उनके समुदाय को शिक्षा से वंचित रखा जाता था। ज्योतिराव ने न सिर्फ खुद पढ़ाई की लड़ाई लड़ी, बल्कि अपनी पत्नी सावित्रीबाई को भी पढ़ाया। आगे चलकर दोनों ने मिलकर समाज में शिक्षा की अलख जगाई।

पितृसत्तात्मक समाज से टक्कर

सावित्रीबाई फुले अपने समय से बहुत आगे थीं। महिलाओं और दलितों को पढ़ाने पर उन्हें समाज के एक बड़े वर्ग का विरोध झेलना पड़ा। जब वे पढ़ाने जाती थीं, तो उन पर कीचड़ और गोबर फेंका जाता था। वे एक अतिरिक्त साड़ी साथ रखती थीं, ताकि स्कूल पहुंचकर बदल सकें। एक बार हद पार होने पर उन्होंने विरोध करने वाले युवक को थप्पड़ भी मारा।

घर से निकाले गए

उनकी समाज सुधार की गतिविधियों से नाराज होकर ज्योतिराव फुले के माता-पिता ने उन्हें घर छोड़ने को कहा। सावित्रीबाई को घर से नहीं निकाला गया था, लेकिन उन्होंने अपने पति का साथ देने के लिए खुद घर छोड़ दिया।

देश का पहला बालिका विद्यालय

साल 1848 में पुणे में सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने भारत का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर कुल 18 स्कूल खोले। गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के लिए छात्रवृत्ति भी दी जाती थी।

बलात्कार पीड़ित महिलाओं के लिए केंद्र

सावित्रीबाई फुले ने गर्भवती बलात्कार पीड़ित महिलाओं के लिए सुरक्षित केंद्र शुरू किए, जहां वे बच्चों को जन्म दे सकें। उन्होंने ‘महिला सेवा मंडल’ भी बनाया, जहां महिलाएं अपने अधिकारों और समस्याओं पर खुलकर बात कर सकें।

कवयित्री भी थीं सावित्रीबाई

सावित्रीबाई फुले एक बेहतरीन मराठी कवयित्री भी थीं। उनकी कविता संग्रह ‘काव्य फुले’ 1854 में प्रकाशित हुई। अपनी कविताओं के जरिए वे शिक्षा, समानता और अंग्रेजी सीखने का संदेश देती थीं।

पति की चिता को दी अग्नि

पति ज्योतिराव फुले के निधन के बाद सावित्रीबाई ने खुद उनकी चिता को अग्नि दी। उस समय यह काम केवल पुरुष करते थे, लेकिन उन्होंने परंपराओं को तोड़कर एक नई मिसाल कायम की।

सेवा करते हुए हुआ निधन

1897 में जब ब्यूबोनिक प्लेग फैला, तो सावित्रीबाई फुले और उनके दत्तक पुत्र ने बीमारों के लिए एक क्लिनिक खोला। एक बीमार व्यक्ति को कंधे पर उठाकर ले जाते समय वे खुद संक्रमित हो गईं और सेवा करते हुए उनका निधन हो गया।

सावित्रीबाई फुले की जयंती को अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस घोषित करने की मांग

ऑल इंडिया ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIOBCSA) ने मांग की है कि सावित्रीबाई फुले की जयंती को अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस घोषित किया जाए। साथ ही संसद परिसर में उनके पति ज्योतिराव फुले की प्रतिमा के पास सावित्रीबाई फुले की भी प्रतिमा लगाई जाए। संगठन ने हर संसदीय क्षेत्र में पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास बनाने और विश्वविद्यालयों में ‘फुले सेंटर’ खोलने की भी मांग की है, ताकि पिछड़े वर्गों के छात्रों को पढ़ाई और रिसर्च में मदद मिल सके।

सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा और साहस के दम पर समाज को बदला जा सकता है। सावित्रीबाई फुले जयंती 2026 पर उनका संघर्ष और योगदान आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

AT
About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
Read more Articles on

Recommended Stories

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी दे रही है 7 फ्री डेटा साइंस कोर्स करने का मौका, जानिए पूरी डिटेल
School Timings Changed: अब सुबह-सुबह नहीं जाना पड़ेगा स्कूल, इस शहर में बदली क्लास टाइमिंग