
Special Educator Permanent Jobs: पश्चिम बंगाल सरकार ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों (Special Needs Children ) के लिए वर्किंग टीचर्स को परमानेंट करने का बड़ा फैसला लिया है। ये टीचर्स अब तक संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब जल्द ही इन्हें परमानेंट पोस्टिंग दी जाएगी। इस कदम से न केवल इन टीचरों को करियर में स्थिरता मिलेगी, बल्कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए भी बेहतर शिक्षा सुनिश्चित होगी।
राज्य सरकार ने स्पेशल नीड वाले बच्चों के स्पेशल टीचर्स की भर्ती को स्थायी करने और 10% पद उनके लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है। पहले ये टीचर केवल अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त होते थे, जिससे उनकी नौकरी की कोई गारंटी नहीं थी। इस कदम के पीछे सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना है, जिससे अयोग्य भर्तियों और भ्रष्टाचार पर रोक लगे।
2016 में हुए एसएससी भर्ती घोटाले के बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने कई पैनल रद्द कर दिए थे। हजारों टीचर अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के कारण नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इस नए फैसले के जरिए सरकार टीचरों की भर्ती प्रक्रिया को स्पष्ट और रिस्क फ्री बनाना चाहती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 के अंत तक विशेष टीचरों को स्थायी नियुक्ति दी जाएगी। सरकार इस फैसले से स्कूलों में समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को बढ़ावा देना चाहती है। टीचरों के एक संगठन "टीचर्स यूनिटी फोरम" के सदस्य किंकर अधिकारी ने इस कदम की सराहना की और जल्द से जल्द इसे लागू करने की अपील की।
अगर यह योजना सफल होती है, तो अन्य राज्य भी इसे अपनाकर अपने विशेष टीचरों को स्थायित्व प्रदान कर सकते हैं। यह फैसला न केवल टीचरों के लिए राहत भरा है, बल्कि इससे बच्चों को भी ट्रेंड और परमानेंट टीचर्स मिल सकेंगे। यह कदम पश्चिम बंगाल में एजुकेशन सिस्टम को सुधारने और विशेष जरूरतों वाले बच्चों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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