Viral Post: क्या अब एक नौकरी में 3 लोगों का काम करना नया नॉर्मल है? Reddit पर यूजर का सवाल हुआ वायरल

Published : May 14, 2025, 01:20 PM IST
employee burnout 2025

सार

Viral Post: Reddit पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें बताया गया है कि कंपनियां अब एक ही सैलरी में तीन लोगों का काम करवा रही हैं। हजारों लोगों ने अपनी आपबीती शेयर की है, जिससे ये साफ होता है कि एक बड़ा मुद्दा है।

Viral Reddit Job Post: आजकल की नौकरियों में कर्मचारियों से क्या उम्मीदें रखी जा रही हैं, इसको लेकर एक Reddit यूजर की पोस्ट ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है। पोस्ट में यूजर ने लिखा है कि अब एक सामान्य सी नौकरी के लिए भी कंपनियां एक साथ तीन लोगों के काम की मांग करती हैं और वो भी सिर्फ एक इंसान से और एक ही सैलरी में। इस पोस्ट को देखने के बाद हजारों लोग अपनी-अपनी कहानियां शेयर करने लगे, जिससे ये साफ हो गया कि यह केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि आज की नौकरी की हकीकत बन चुकी है।

Reddit पोस्ट करने वाले यूजर ने क्या लिखा, जो हो गया Viral

पोस्ट करने वाले यूजर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में एक जॉब ओपनिंग देखी जिसमें कैंडिडेट से डिग्री, पांच साल से ज्यादा का अनुभव, ग्राफिक डिजाइन, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, वीडियो एडिटिंग, एक्सेल एक्सपर्टीज, कस्टमर सर्विस, और डेटा एनालिसिस जैसे कई स्किल्स की मांग की गई थी। लेकिन इसके बदले में ऑफर किया गया वेतन केवल $50,000 (लगभग ₹42.7 लाख प्रति वर्ष) था, वो भी बिना किसी एक्स्ट्रा लाभ या सुविधा के।

 

 

क्या अब यही नई नॉर्मल नौकरी है? Reddit यूजर का बड़ा सवाल

यूजर ने सवाल किया: “क्या अब यही नई नॉर्मल नौकरी है? क्या अब हर कोई एक साथ तीन लोगों का काम करने के लिए मजबूर है? क्या ये सब आर्थिक मंदी की वजह से है या ये कंपनियों की नई स्ट्रैटेजी बन चुकी है? क्या हमें धीरे-धीरे ये यकीन दिलाया जा रहा है कि बर्नआउट होना अब आम बात है?”

इंटरनेट पर वायरल हो गया यह Reddit पोस्ट, हजारों लोगों ने रखी अपनी बात

यह सवाल इंटरनेट पर तेजी से फैल गया और हजारों लोगों ने अपनी बात रखी। एक यूजर ने प्रतिक्रिया में लिखा, “जब भी अर्थव्यवस्था में कोई बड़ी समस्या आती है, कंपनियां उसकी भरपाई कर्मचारियों पर दबाव बढ़ाकर करती हैं। और जब सब कुछ ठीक हो जाता है, तब भी वो उसी सिस्टम को बनाए रखती हैं जैसे ये अब ‘नॉर्मल’ हो चुका हो।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “मैंने अपनी नौकरी में सिर्फ अपने काम से शुरुआत की थी, लेकिन धीरे-धीरे जो भी लोग नौकरी छोड़ते गए, उनकी जिम्मेदारियां भी मुझ पर डाल दी गईं। जब मैंने सैलरी बढ़ाने की बात की, तो मैनेजर ने कहा कि ‘हम छोटी कंपनी हैं, और सबको एक-दूसरे का काम आना चाहिए’। अब मैंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया है।”

कई लोगों ने ये भी कहा कि 2008 की आर्थिक मंदी के बाद से यह ट्रेंड और तेज हो गया है। एक यूजर ने लिखा, “2008 में जो आर्थिक संकट आया, उसने अमीरों को और अमीर बनाया और मिडल क्लास वर्कर्स की हालत खराब कर दी। तब से लेकर अब तक, पैसे का बहाव केवल ऊपर की तरफ रहा है। यह एक सोच-समझकर बनाया गया सिस्टम लगता है न कि कोई प्राकृतिक आपदा।”

ऐसी तमाम कहानियों ने इस बात पर रोशनी डाली है कि कैसे आज के समय में कर्मचारी न सिर्फ बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं, बल्कि उन्हें कम सैलरी में, बिना सुविधाओं के, कई जिम्मेदारियां उठानी पड़ रही हैं। इस पूरी बहस ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या वाकई अब काम करने का तरीका इतना बदल गया है कि इंसानों से मशीनों जैसी परफॉर्मेंस की उम्मीद की जा रही है? या फिर यह पूंजीवाद की एक नई और खतरनाक शक्ल है, जहां इंसान की मेहनत का मोल घटता जा रहा है?

जहां एक तरफ टेक्नोलॉजी और स्किल्स की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को पर्याप्त इकोनॉमिक और मेंटल हेल्प न मिल पाना, आज की कॉर्पोरेट दुनिया की एक गंभीर सच्चाई बन चुका है। ये Reddit पोस्ट बस एक शुरुआत थी, जिसने लाखों लोगों को अपनी आवाज उठाने का मौका दिया।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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