
Who is Justice Surya Kant: भारत के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को शपथ ले ली। वे जस्टिस बीआर गवई के बाद देश के 53वें CJI बने हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अहम मामलों पर फैसलों में भूमिका निभाई है, जिनमें आर्टिकल 370 हटाने, बिहार की मतदाता सूची संशोधन और पेगासस जासूसी मामले से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं। हरियाणा के हिसार जिले का पेटवाड़ गांव, जहां से जस्टिस सूर्यकांत ताल्लुक रखते हैं, आज जश्न से सराबोर है। गांव में ढोल-नगाड़े बज रहे हैं, मिठाई बांटी जा रही है और लोग पूरे गर्व के साथ कह रहे हैं- हमारा सूरज आज देश की सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठा है। इस बी जानिए 53वें CJI जस्टिस सूर्यकांत के एजुकेशन, करियर, फैमिली और उनके लाइफ की रोचक बातें।
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में एक सामान्य परिवार में जन्मे सूर्यकांत ने अपनी शुरुआत एक छोटे कस्बे में वकालत से की थी। धीरे-धीरे अपनी मेहनत और कानूनी समझ के दम पर वे देश की सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे और अब CJI बन गए।
उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से लॉ में मास्टर्स किया और वह भी फर्स्ट क्लास फर्स्ट के साथ। सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं। इसके अलावा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में भी उन्होंने कई यादगार फैसले दिए।
जस्टिस सूर्यकांत के पिता मदनलाल शास्त्री संस्कृत के शिक्षक और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे। मां शांति देवी अपनी सादगी और गुणों के लिए पूरे गांव में जानी जाती थीं।। जस्टिस सूर्यकांत के भाई भी प्रतिष्ठित शिक्षक हैं। यही कारण है कि वह हर स्तर पर संतुलित सोच रखते हैं।
गांव के लोग बताते हैं कि जस्टिस सूर्यकांत हर साल अपने गांव के दोनों स्कूलों, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, के टॉपर्स को सम्मानित करते हैं। उन्होंने 2004 से लेकर अब तक 11 बार गांव के दोनों स्कूलों में जाकर बच्चों को सम्मानित किया है।
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जस्टिस सूर्यकांत के भाई महेंद्र प्रकाश के अनुसार एक समय ऐसा था जब पिता चाहते थे कि सूर्यकांत इंजीनियर बने। लेकिन सूर्यकांत को कानून पढ़ने में अधिक रुचि थी। उन्होंने पटियाला से कानून की पढ़ाई की और बाद में हिसार में वकालत शुरू की। सूर्यकांत शुरू से ही पढ़ाई में बेहद तेज थे। स्कूल के समय से लेकर कॉलेज तक हमेशा अव्वल रहे।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस सूर्यकांत की पत्नी ज्योति के अनुसार जब विवाह की बात चल रही थी, तब सूर्यकांत ने साफ कहा था कि लड़की को गांव में एडजस्ट होना पड़ेगा। वह पहली बार गांव आई तो लग ही नहीं रहा था कि यह गांव है। महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर हर सुविधा यहां मौजूद थी। सूर्यकांत आज भी अपने गांव से गहराई से जुड़े हुए हैं। मौके-मौके पर गांव आते रहते हैं।
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