Viral Post: अंग्रेजी कमजोर थी, पर टैलेंट जबरदस्त...बॉस ने नौकरी दी, फिर जो हुआ वो कमाल था!

Published : Aug 20, 2026, 06:44 PM IST
Viral Post: अंग्रेजी कमजोर थी, पर टैलेंट जबरदस्त...बॉस ने नौकरी दी, फिर जो हुआ वो कमाल था!

सार

मुंबई के उद्यमी कनन बहल ने खराब अंग्रेजी वाले एक प्रतिभाशाली युवक को नौकरी दी। काम में बेहतरीन होने के कारण, उसे क्लाइंट्स से हिंदी में बात करने की छूट मिली। यह फैसला उनकी कंपनी की सबसे सफल भर्तियों में से एक साबित हुआ।

भारत में अच्छी अंग्रेजी न बोल पाने की वजह से कितने ही काबिल लोगों को नौकरी नहीं मिलती। टैलेंट होने के बावजूद कई कंपनियां उन्हें मौका नहीं देतीं। लेकिन, मुंबई के एक आंत्रप्रेन्योर कनन बहल ने इस सोच को किनारे रखकर एक ऐसा फैसला लिया, जो अब सोशल मीडिया पर मिसाल बन गया है। उन्होंने अपना अनुभव 'X' पर शेयर किया है, जो खूब वायरल हो रहा है।

कनन ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने एक टियर-2 शहर के लड़के का इंटरव्यू लिया। उसकी अंग्रेजी बहुत खराब थी, लेकिन जब उसे एक सैंपल टास्क दिया गया, तो उसने कमाल कर दिया। कनन उसे नौकरी देने के बारे में सोचकर हिचक रहे थे, क्योंकि इस रोल में सीधे क्लाइंट्स से बात करनी थी।

कनन बताते हैं, "मैं उन लोगों को नौकरी दे-देकर थक चुका था, जिनकी अंग्रेजी तो शानदार थी, लेकिन काम में वे पीछे रह जाते थे।" इसलिए, उन्होंने उस लड़के को मौका देने का फैसला किया। उन्होंने अपने नए कर्मचारी को पूरी छूट दी कि वह क्लाइंट्स से आत्मविश्वास के साथ हिंदी में बात करे।

आज कनन का कहना है कि यह उनकी कंपनी की सबसे बेहतरीन भर्तियों में से एक थी। उन्होंने कुमार विश्वास का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे वे सिर्फ अपनी मातृभाषा के दम पर लोगों का दिल जीत लेते हैं। उन्होंने जापान, चीन और कोरिया जैसे देशों का भी जिक्र किया, जहां लोग अपनी भाषा में ही कारोबार करके सफल हो रहे हैं। कनन ने साफ कहा कि अच्छी अंग्रेजी बोलना जरूरी हो सकता है, लेकिन यह किसी की बुद्धिमानी या काबिलियत का पैमाना नहीं है।

यह पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने इस पर जमकर रिएक्शन दिए। कई लोगों ने भारत के वर्क कल्चर पर कमेंट करते हुए कहा कि यहां अक्सर अंग्रेजी जानने वालों को ज्यादा काबिलियत वाले लोगों पर तरजीح दी जाती है। एक यूजर ने लिखा, 'ऑस्ट्रेलिया में टेक्निकल नौकरियों में भी, जहां क्लाइंट से बात करनी होती है, कोई यह नहीं पूछता कि आपकी अंग्रेजी कैसी है।'

एक और यूजर ने लिखा, 'दूसरे देशों में अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा है, लेकिन भारत में इसे एक 'स्किल' माना जाता है। यह बहुत दुख की बात है।' लोगों की इन बातों से साफ है कि कनन के इस कदम ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है।

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About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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