H-1B Visa: अमेरिका में गई नौकरी, हॉस्टल में की सफाई! 15 मिनट के फोन कॉल ने बदली भारतीय की ज़िंदगी

Published : Aug 20, 2026, 04:40 PM IST
H-1B Visa: अमेरिका में गई नौकरी, हॉस्टल में की सफाई! 15 मिनट के फोन कॉल ने बदली भारतीय की ज़िंदगी

सार

अमेरिका में H-1B नौकरी खोने पर विनय माहेश्वरी को 60 दिनों में नया काम खोजना था। वीज़ा के कारण नौकरी न मिलने और पैसे खत्म होने पर उन्होंने हॉस्टल में काम किया। भारत लौटकर उन्होंने अपने अनुभव पर 'रीराउटेड' किताब लिखी।

अमेरिका में विनय माहेश्वरी की अच्छी-खासी जमी-जमाई ज़िंदगी चल रही थी, लेकिन सिर्फ 15 मिनट के एक फोन कॉल ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया। मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले विनय कई सालों से अमेरिका में थे, पहले एक स्टूडेंट के तौर पर और फिर एक कॉर्पोरेट जॉब में। लेकिन फिलाडेल्फिया में जब वह H-1B वीज़ा पर काम कर रहे थे, तो उनके मैनेजर का फोन आया और उन्हें बताया गया कि कंपनी उन्हें नौकरी से निकाल रही है। इस एक कॉल ने उनकी सालों की मेहनत पर अचानक ब्रेक लगा दिया।

60 दिनों की टेंशन!

H-1B वीज़ा नियमों के मुताबिक, नौकरी जाने के बाद किसी व्यक्ति के पास नया काम खोजने या देश छोड़ने के लिए सिर्फ 60 दिनों का वक्त होता है। विनय के लिए ये दो महीने उनकी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल और तनाव भरे दिन थे।

सैकड़ों अर्जियां दीं: उन्होंने सैकड़ों कंपनियों में नौकरी के लिए अप्लाई किया।

खामोशी मिली: शुरुआत में रिक्रूटर दिलचस्पी दिखाते, लेकिन जैसे ही वीज़ा स्पॉन्सरशिप (Work Authorization) की बात आती, वे पूरी तरह चुप हो जाते।

दबाव का माहौल: उन्हें ऐसा महसूस होता था जैसे हर दिन उनके बगल में एक टाइम बम टिक-टिक कर रहा हो।

उन्होंने कंपनी से और समय देने की गुजारिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। विनय को गुस्सा आने के बजाय, अंदर से एक अजीब सा खालीपन महसूस हो रहा था।

पैसे खत्म, गुज़ारे के लिए चुना नया रास्ता!

अमेरिका में कानूनी तौर पर कुछ और दिन रुकने के लिए उन्होंने B1/B2 विज़िटर वीज़ा के लिए अप्लाई किया। लेकिन बिना काम के दिन बीतते गए और उनकी बचत के पैसे भी तेज़ी से खत्म होने लगे। अमेरिका में टिके रहने का जब कोई और रास्ता नहीं दिखा, तो उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना के ऐशविले में एक हॉस्टल में 'वर्क एक्सचेंज' करने का फैसला किया। इसके तहत उन्हें मुफ्त रहने और खाने के बदले काम करना था।

हालात का तमाशा देखिए: सिर्फ दो महीने पहले जो विनय कंपनी के काम से 'मैरियट' जैसे लक्ज़री होटलों में रुकते थे, अब वही विनय हॉस्टल के कमरे साफ करने और पोछा लगाने की स्थिति में आ गए थे।

मानसिक शांति मिली: भले ही हालात बदल गए थे, लेकिन हॉस्टल के इन दिनों ने उन्हें एक नई ताज़गी दी। वहां मौजूद लोगों को H-1B वीज़ा या नौकरी की डेडलाइन जैसी बातों से कोई मतलब नहीं था। वीज़ा स्टेटस के तनाव के बिना, वह वहां आने वाले यात्रियों से खुलकर मिल-जुल पा रहे थे।

किताब 'रीराउटेड' और भारत वापसी!

अमेरिका में नौकरी जाने और उसके बाद की चुनौतियों के अनुभव ने उन्हें 'रीराउटेड' (Re-routed) नाम की एक किताब लिखने के लिए प्रेरित किया। पिछले साल के आखिर में वह भारत लौट आए। उन्होंने देखा कि रेडिट (Reddit) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर H-1B वीज़ा खोने वाले कई भारतीयों की कहानियां तो हैं, लेकिन मुख्यधारा में इमिग्रेशन से जुड़ी बहसों में इन बातों का ज़िक्र तक नहीं होता।

ज़िंदगी का नया पड़ाव!

विनय अपनी किताब के ज़रिए उस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके बारे में कोई बात नहीं करता। वह कहते हैं, "हर कोई अमेरिका जाने की बात करता है, लेकिन वहां से लौटने की नौबत आ जाए तो क्या होता है, इस पर कोई चर्चा नहीं करता।" आज विनय माहेश्वरी भारत में हैं और हिम्मत के साथ अपनी ज़िंदगी का एक नया अध्याय लिख रहे हैं।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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