दिल्ली हाईकोर्ट ने DSSSB पर लगाया जुर्माना, पास कैंडिडेट्स को नियुक्ति देने में देरी का मामला

Published : May 27, 2022, 04:29 PM IST
दिल्ली हाईकोर्ट ने DSSSB पर लगाया जुर्माना, पास कैंडिडेट्स को नियुक्ति देने में देरी का मामला

सार

जस्टिस नज्मी वजीरी और स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया है।   कोर्ट ने तान्या शर्मा के वकील अनुज अग्रवाल ने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सरकार को तान्या शर्मा की वरिष्ठता क्रम को इस भर्ती में नियुक्ति हुए अन्य शिक्षकों के बराबर रखने का आदेश दिया है।

करियर डेस्क. दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। ये जुर्माना दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में सहायक टीचर को सिलेक्शन के बाद भी नियुक्ति नहीं देने के देरी के मामले में लगाया गया है। इस मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया और डीएसएसएसबी पर जुर्माना लगाया है। जस्टिस नज्मी वजीरी और स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया है।  इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि एक महीने के अंदर तान्या शर्मा को उनका नियुक्ति पत्र दिया जाए।

कोर्ट ने तान्या शर्मा के वकील अनुज अग्रवाल ने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सरकार को तान्या शर्मा की वरिष्ठता क्रम को इस भर्ती में नियुक्ति हुए अन्य शिक्षकों के बराबर रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि फैक्ट के आधार पर डीएसएसएसबी ने याचिकाकर्ता को ई-डोजियर में आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के लिए समय नहीं दिया था। हालांकि इस मामले में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने कहा कि कैंडिडेट्स को दो बार अपने डॉक्यूमेंट अपलोड करने का मौका दिया गया था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 

कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अब कहा कि एक महीने के अंदर सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तान्या शर्मा को नियुक्ति दी जाए। कोर्ट ने कहा- डीएसएसएसबी द्वारा सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक नर्सरी के 2019 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई और तान्या शर्मा ने भी यह परीक्षा दी थी इसके बाद वो इसमें पास हो गई छीं। लेकिन 16 अगस्त, 2021 को डीएसएसएसबी ने डिप्लोमा प्रमाण पत्र जमा नहीं करने के बाद तान्या को नियुक्ति को रद्द कर दिया था। जिसके बाद तान्या ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी। 

तान्या ने इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। तान्या के वकील अनुज अग्रवाल के माध्यम से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल की। वहां से राहत नहीं मिलने के बाद हाई कार्ट में याचिका दायर की थी। इसी मामले में अब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।  

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