
Coaching Center Permissions: लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक कोचिंग अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। शुरुआती जांच में सामने आया कि बिल्डिंग में बाहर निकलने का सिर्फ एक रास्ता था, जबकि इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था नहीं थी। आग लगते ही पूरी बिल्डिंग धुएं से भर गई और कई छात्र अंदर फंस गए। इस हादसे के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या हमारे शहरों में चल रहे कोचिंग सेंटर सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं? अगर आप अपने बच्चे को कोचिंग भेजते हैं या खुद कोचिंग सेंटर खोलने की सोच रहे हैं, तो ये 5 परमिशन और नियम जानना बेहद जरूरी है...
अगर किसी कोचिंग सेंटर में 25 से ज्यादा छात्र हैं, तो वहां फायर सेफ्टी NOC बेहद जरूरी मानी जाती है। इसमें फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और बाहर जाने का सेफ रास्ता शामिल हैं। ऐसे में जब भी बच्चे का एडमिशन कराने जाएं तो जररू पूछें कि क्या इस बिल्डिंग के पास फायर NOC है?
कोचिंग सेंटर को स्थानीय निकाय या नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस लेना होता है। यह प्रमाणित करता है कि बिल्डिंग का इस्तेमाल कॉमर्शियल गतिविधि के लिए किया जा सकता है और स्थानीय नियमों का पालन हो रहा है। दरअसल, किसी भी रिहायशी या कमर्शियल इलाके में कोचिंग संस्थान चलाना एक व्यावसायिक (Commercial) गतिविधि है। इसके लिए आपको अपने शहर के नगर निगम यानी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से ट्रेड लाइसेंस लेना जरूरी होता है।
कई लोग सिर्फ क्लास शुरू कर देते हैं, लेकिन कानून के मुताबिक, शॉप एंड एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस (गुमाश्ता) भी जरूरी होता है। इससे कर्मचारियों के अधिकार, साफ बाथरूम, पीने के पानी की व्यवस्था और बेसिक सेफ्टी स्टैंडर्ड तय होता है। यह सर्टिफिकेट लेबर डिपार्टमेंट से मिलता है। इस लाइसेंस से पता चलता है कि आपकी बिल्डिंग कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है।
ये सर्टिफिकेटसाबित करता है कि बिल्डिंग NBC (National Building Code) के हिसाब से बनी है। अगर बिल्डिंग में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं है, सुरक्षित बाहर जाने का रास्ता नहीं हैं या स्ट्रक्चरल खामियां हैं,तो छात्रों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
2024 की गाइडलाइंस के मुताबिक, 50 से ज्यादा छात्रों वाले कोचिंग सेंटरों को रजिस्ट्रेशन कराना होता है। साथ ही हर छात्र के लिए कम से कम 1 वर्ग मीटर जगह होनी चाहिए। इसके अलावा CCTV कैमरे, फर्स्ट एड किट, दिव्यांग के लिए सुविधाएं, काउंसलिंग और साइकोलॉजिकल हेल्प जैसे स्टैंडर्ड का पालन करना जरूरी बताया गया है।
कोचिंग सेंटरों के लिए एक अहम नियम यह भी है कि हर छात्र के लिए कम से कम 1 वर्ग मीटर जगह होनी चाहिए। मतलब अगर किसी कमरे का आकार 300 वर्ग मीटर है, तो वहां 300 से ज्यादा छात्रों को नहीं बैठाया जा सकता। ओवरक्राउडिंग सिर्फ पढ़ाई की क्वॉलिटी नहीं घटाती, बल्कि किसी अनहोनी के समय जानलेवा भी साबित हो सकती है।
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