
नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनावों में भले ही एग्जिट पोल आम आदमी पार्टी के पक्ष में आए थे, पर जब नतीजे आने शुरु हुए तो भाजपा की उम्मीदें जग गई थी। पार्टी के नेताओं ने भले ही राज्य में सरकार बनाने की ना सोची हो, पर विपक्ष का दर्जा मिलने का ख्याल उनके दिमाग में जरूर था। मुस्तफाबाद में भी भाजपा विधायक जीत के भरोसे के साथ बैठे थे। साढ़े 11 बजे तक वो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार से 27000 वोटों से आगे भी चल रहे थे, पर इसके बाद खेल पलटा और 3 बजे तक इस सीट में आम आदमी पार्टी की जीत हो चुकी थी।
आखिरी 6 राउंड में पलटी बाजी
आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार ने पहले 27000 वोटों से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की और अंत में 20,704 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। वोटों की गिनती के दौरान कुल 26 राउंड में इस सीट के नतीजे आए। शुरुआती 20 राउंड में भाजपा उम्मीदवार बड़ी आसानी से बढ़त बनाकर बैठे थे और अपनी जीत की खुशी मनाने की तैयारी कर रहे थे, पर इसके बाद बाजी पलटी और भाजपा के विधायक को हार का मुंह देखना पड़ा।
पहले राउंड की गिनती के बाद भाजपा उम्मीदवार को 4480 वोट मिले थे, जबकि आम आदमी पार्टी को सिर्फ 1794 वोट ही मिले थे, पर आखिरी 6 राउंड में जहां आम आदमी पार्टी को 30,000 के करीब वोट मिले तो भाजपा को सिर्फ 7,223 वोट ही नसीब हुए। इसी के साथ आखिरी के राउंड में भाजपा के उम्मीदवार को हार का मुंह देखना पड़ा।
अधिकतर सीटों का यही हाल
दिल्ली की बाकी सीटों में भी भाजपा ने बढ़त के साथ शुरुआत की थी और लग रहा था कि पार्टी राज्य में 20 से 25 सीटें अपने नाम करेगी, पर समय के साथ बाजी पलटती गई और अंत में मनोज तिवारी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने वाली पार्टी को महज 8 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा। आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटें जीतकर एक बार फिर राज्य में अपनी सरकार बना ली।
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