
नई दिल्ली. निर्भया के चारों दोषियों को 7 दिन का वक्त मिला है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि 7 दिन में चारों दोषी अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर लें। कोर्ट के फैसले पर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि मैं कोर्ट के फैसले का स्वागत करती हूं। बता दें कि केंद्र सरकार ने याचिका दायर की थी कि जिस दोषी के सभी विकल्प खत्म हो गए हैं, उन्हें फांसी दी जाए।
निर्भया की मां ने क्या कहा?
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भया की मां ने कहा, मैं हाई कोर्ट के आदेश का स्वागत करती हूं। वे (दोषी) फांसी की सजा में देरी के लिए सभी तरह की कोशिश कर रहे हैं। अब हाईकोर्ट ने दोषियों को एक हफ्ते में सभी कानूनी विकल्प आजमा लेने की मोहलत दी है।
मौत से बचने के लिए दोषियों के पास कितने विकल्प?
दोषी मुकेश और विनय की सुप्रीम कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद रिव्यू, क्यूरेटिव और फिर दया याचिका खारिज हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में रिट डालने का अधिकार हमेशा रहता है। अक्षय की रिव्यू और क्यूरेटिव खारिज हो चुकी है, लेकिन दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। पवन की क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका दोनों ही बची है।
गैंगरेप से 13 दिन बाद निर्भया ने तोड़ दिया था दम
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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