
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पूरी तरह से मैदान में उतर गया है। संघ ने दिल्ली में बीजेपी की जीत बुनियाद रखने के लिए बकायदा 11 प्वाइंट एजेंडे के साथ मैदान में उतरे हैं और उसे फोल्डर की शक्ल में बनाकर घर-घर पहुंचाने का काम स्वंय सेवक कर रह हैं।
आरएसएस ने 11 प्वाइंट को दिल्ली को फतह करने के लिए जो एजेंडा बनाया है। उस फोल्डर के ऊपर नारा दिया गया है कि सुरक्षित दिल्ली-सशक्त भारत। इसके अलावा यह भी लिखा गया है कि बीजेपी को वोट क्यों दें और आम आदमी पार्टी को क्यों वोट न दें। इन दोनों प्वाइंट पर पांच-पांच प्वाइंट दिए गए हैं।
संघ ने बीजेपी को वोट क्यों दें
इस पर मोदी सरकार द्वारा हाल ही लिए फैसले को जिक्र है। संघ ने साफ किया है कि बीजेपी सरकार के चलते ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया गया है और समस्या का समाधान हुआ है, जिसके चलते दशकों से अपने घरों से दूर रहने को मजबूर लाखों कश्मीरी पंडित का अपने घर लौटने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
राम मंदिर पर संघ के फोल्डर में जिक्र है
अयोध्या मामला सालों से कोर्ट में लटका हुआ था, जिसे बीजेपी सरकार के समर्पण के चलते समाधान किया गया है। सीएए पर कहा गया है कि जिन देशों में हजारों मंदिर तोड़ा गया, जबरन हिंदू समुदाय के लोगों धर्म परिवर्तन कराया गया। मोदी सरकार के कानून लाने से उन्हें अब भारत की नागरिकता मिलेगा। इसके अलावा सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण मोदी सरकार के चलते मिला है।
मोदी सरकार की विकास योजनाएं
इसके अलावा मोदी सरकार की विकास योजनाओं का भी जिक्र किया गया है, जिसमें आयुष्मान योजना, मुफ्त में गैस सिलेंडर, प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ इंडिया गेट पर राष्ट्रीय युदद्ध मेमोरियल का निर्माण किया गया। इन सारी बातों के जरिए बीजेपी को वोट देने की अपील की गई है।
आम आदमी पार्टी को क्यों वोट नहीं
साथ ही साथ संघ ने यह भी साफ किया है कि आम आदमी पार्टी को क्यों वोट नहीं देना चाहिए। इसके लिए पैंफलेट में लिखा है कि क्या हम ऐसे लोगों को वोट देना चाहेंगे, जिन्होंने टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोगों पर केस चलाने की अनुमति नहीं दी। इन्हीं लोगों के चलते हिंदू को नागरिकता देने के विरोध में लोग सड़के जाम किए हुए हैं।
इनके विधायक और नेता कहते हैं हिंदुओं की कब्र खुदेगी, जामिया की छाती पर नारा लगवा कर हिंसा को उकसाते हैं। जामिया हिंसा की बात का भी जिक्र है। मस्जिद के इमामों के वेतन दे रही है। क्या ऐसे लोगों को दिल्ली में वोट दिया जाना चाहिए। इसके अलावा शाहीन बाग आंदोलन पर भी सवाल पूछा गया है।
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