
‘बंदर’ एक आसान फिल्म नहीं है, और न ही यह आपको आराम से देखने देती है। अनुराग कश्यप की यह फिल्म एक ऐसे स्टार की कहानी दिखाती है जो ग्लोरी से गिरकर कानूनी और सोशल मीडिया ट्रायल के बीच फंस जाता है। बॉबी देओल एक ऐसे किरदार में हैं जो टूटता भी है और अंदर से लड़ता भी है। फिल्म सिर्फ कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि पब्लिक जजमेंट, डिजिटल भीड़ और धीमी न्याय व्यवस्था की परतों को खोलती है। यह एक ऐसा अनुभव है जो आपको मनोरंजन से ज्यादा सोचने पर मजबूर करता है।
फिल्म की कहानी समीर मेहरा (बॉबी देओल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक गिरता हुआ फिल्म स्टार है और अपनी पुरानी पहचान को बचाने की कोशिश कर रहा है। तभी उसकी जिंदगी में एक बड़ा तूफान आता है जब उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगा देती है। इसके बाद शुरू होता है एक हाई-प्रोफाइल केस, जहां कोर्ट से ज्यादा ताकत सोशल मीडिया की राय बन जाती है। धीरे-धीरे सच, झूठ, भावनाएं और पब्लिक ओपिनियन सब एक-दूसरे में उलझ जाते हैं।
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बॉबी देओल इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। वह अपने किरदार को कमजोरी और टूटन के साथ बेहद ईमानदारी से निभाते हैं। सान्या मल्होत्रा अपने सीमित स्क्रीन टाइम में भी मजबूत असर छोड़ती हैं। सबा आज़ाद और सपना पब्बी अपने रोल्स में गहराई जोड़ती हैं, जबकि जीतेन्द्र जोशी हर सीन में ध्यान खींच लेते हैं। राज बी. शेट्टी और इंद्रजीत सुकुमारन भी अपनी रॉ और दमदार एक्टिंग से फिल्म को और वजन देते हैं।
अनुराग कश्यप इस बार अपने शोर-शराबे वाले स्टाइल से हटकर ज्यादा कंट्रोल्ड और मैच्योर नजर आते हैं। वह कहानी को सेंसेशनल बनाने की बजाय उसके साइकोलॉजिकल दबाव को दिखाते हैं। जेल और कोर्ट वाले सीन्स बेहद असहज और रियल लगते हैं। हालांकि वह कोई साफ जवाब नहीं देते, बल्कि दर्शक को खुद जज बनाने पर मजबूर करते हैं।
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फिल्म का म्यूजिक ज्यादा हावी नहीं होता, बल्कि कहानी के मूड को सपोर्ट करता है। बैकग्राउंड स्कोर तनाव और बेचैनी को बढ़ाता है, खासकर कोर्ट और जेल सीक्वेंस में। यह फिल्म का इमोशनल इम्पैक्ट बढ़ाने का काम करता है।
सिनेमैटोग्राफी फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। जेल के सीन क्लास्ट्रोफोबिक और भारी महसूस होते हैं। एडिटिंग कुछ जगहों पर ढीली पड़ती है, जिससे दूसरा हाफ थोड़ा लंबा लगता है। लेकिन ओवरऑल टेक्निकल ट्रीटमेंट फिल्म को दमदार और रियलिस्टिक बनाए रखता है।
अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो आपको असहज सवालों के साथ छोड़ दें, तो ‘बंदर’ जरूर देखें। लेकिन अगर आपको साफ-सुथरा एंडिंग वाला कमर्शियल ड्रामा चाहिए, तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार।
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