
Zihal-e-Miskin Makun Baranjish: मिथुन चक्रवर्ती और अनिता राज पर फिल्माया गया गाना ज़िहाल-ए-मिस्कीन मकुन ब-रंजिश सुपरहिट है। साल 1985 में रिलीज गुलामी फिल्म का ये गाना सदाबहार है। इसकी की मेलोडी ऐसी है कि 40 साल बीत जाने के बाद भी ये पुराना नहीं हुआ है। इसकी पहली लाइन का अर्थ… ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते हैं, हालांकि इसे सभी गुनगुनाते हैं। यहां हम आपको इस लाइन का अर्थ बताएंगे, साथी ही इसकी डिटेल भी शेयर कर रहे हैं।
फिल्म 'गुलामी' का गाना 'जिहाल-ए -मिस्कीं मकुन बरंजिश' बेहद कर्णप्रिय गाना है। इसे गुलजार ने लिखा था, जो उर्दू के बेहतीन शायर और गीतकार है। बड़े गीतकारों ने ये माना है कि हर गाना, गजल कहीं ना कहीं से इंस्पायर जरुर होती है। वैसे ही 'जिहाल-ए -मिस्कीं भी अमीर खुसरों की बेहद मशहूर कविता से प्रेरित था।
ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल,
दुराये नैना बनाये बतियां...
कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऐ जान,
न लेहो काहे लगाये छतियां...
ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, का मतलब है- “आंखे फेरके और बातें बनाके मेरी बेबसी को नजरअंदाज मत कर.... हिज्र की तपन से जान निकल रही है, अब तुम मुझे ह्दय से क्यों नही लगाते!"
ज़िहाल-ए मिस्कीं …गाने को लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार ने अपनी आवाजें दी थी। गुलजार के बोल को लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीत दिया था। ऑन स्क्रीन मिथुन चक्रवर्ती और अनिता राज पर ये गाना फिल्माया गया था। इसे राजस्थान के किले पर बंजारों द्वारा किए जा रहे डांस की थीम पर फिल्माया गया था।
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