
Meena Kumari Life Facts: बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में ट्रेजडी क्वीन के नाम से फेमस मीना कुमारी की 53वीं डेथ एनिवर्सरी है। उन्होंने अपनी जिंदगी में खूब संघर्ष किया। पैदा होने के बाद से लेकर मरने तक मीना की जिंदगी दुखों से भरी रही। कहा जाता है कि मीना कुमारी के पिता बेटा चाहते थे और वो पैदा हो गई। पिता की माली हालत इतनी खराब थी कि पैदा होने के बाद मीना कुमारी को अनाथालय छोड़ दिया गया था। हालांकि, पिता का मन नहीं माना तो वे उन्हें वापस घर ले आए थे। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने 7 साल की उम्र में एक्टिंग शुरू कर दी थी। उनकी पहली फिल्म फरजाद-ए हिंद थी। इसके बाद उन्होंने अन्नपूर्णा, सनम, तमाशा, लाल हवेली जैसी फिल्मों में काम किया। उन्हें शोहरत फिल्म बैजू बावरा से मिली जो 1952 में रिलीज हुई थी। मीना कुमारी ने एक्टिंग में खूब सफलता हासिल की, लेकिन रियल लाइफ ट्रेजडी भरी रही।
मीना कुमारी ने अपनी लाजवाब एक्टिंग के जरिए खूब दौलत-शोहरत कमाई। फिल्मों में काम करने के दौरान उनकी मुलाकात डायरेक्टर कमाल अमरोही से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी। ये जानते हुए कि कमाल शादीशुदा और 3 बच्चों के पिता है, मीना कुमारी उनपर अपना दिल हार बैठी थीं। दोनों ने सालभर के अंदर ही शादी करने का फैसला कर लिया था। मीना कुमारी के घरवालें नहीं चाहते थे कि वे शादीशुदा से शादी करें, लेकिन दिल के हाथों मजबूर मीना कुमारी पीछे नहीं हटी और चुपचाप कमाल अमरोही से शादी कर ली। शादी के बाद कुछ वक्त तो दोनों के अच्छे गुजरे, फिर बाद में रिश्ते बिगड़ना शुरू हो गए।
शादी के बाद कमाल अमरोह ने मीना कुमारी पर कई पाबंदियां लगा दी थी। मीना ने भी पति की सारी शर्ते मानी लेकिन झगड़ों का दौर फिर भी कम नहीं हुआ। इन्हीं सब के चलते मीना की जिंदगी उथल-पुथल हो गई और उनको रात में नींद नहीं आने की शिकायत होने लगी। वरिष्ठ पत्रकार विनोद मेहता ने अपनी किताब मीना कुमारी:द क्लासिक बायोग्राफी में लिखा है कि मीना कुमारी को उनके डॉक्टर सईद टिमर्जा ने नींद की गोलियों की जगह रोज एक पेग ब्रांडी पीने की सलाह दी थी। लेकिन ये आदत कब ढेर सारे पेग में बदल गई पता ही नहीं चला। मीना को शराब पीने की लत गई और इसी से उन्हें लिवर सिरॉसिस डाइग्नोस हुआ। उनका इलाज भी हुआ, लेकिन पीने की आदत नहीं छूट पाई और उनकी हालत दिन ब दिन बिगड़ती गई।
एक से एक फिल्मों में काम करने वाली मीना कुमारी ने खूब पैसा और नाम कमाया। पर कहा जाता है कि आखिर वक्त में वे पाई-पाई को मोहताज हो गई थीं। उनके पास खुद का इलाज कराने तक के पैसे नहीं थे। बता दें कि मीना कुमारी और नरगिस एक-दूसरे के बेहद करीब थी। नरगिस ने मीना कुमारी को जिंदगीभर घुट-घुटकर जीते देखा था। लेकिन जब मीना की मौत हुई तो वे बेहद खुश हुई। नरगिस से मीना कुमारी की मौत के बाद उन्हें एक लेटर लिखा था, जो बाद एक मैगजीन में पब्लिश हुआ था। नरगिस से लिखा था- आपकी मौत पर बधाई, मैंने ऐसा पहले कभी नहीं कहा। मीना, आज तुम्हारी बाजी तुम्हें तुम्हारी मौत पर बधाई देती है और कहती है कि तुम फिर कभी इस दुनिया में कदम मत रखना। यह जगह तुम जैसे लोगों के लिए नहीं है। बता दें कि मीना कुमारी आखिरी फिल्म पाकीजा 4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई थी और मीना ने 31 मार्च 1972 को आखिरी सांस ली थी।
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