Disha Salian Death Investigation: दिशा सालियन केस में सीबीआई की एफआईआर ने करीब छह साल पुराने मामले को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। दिशा के परिवार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दिशा सालियन केस में सियासी घमासान, आदित्य ठाकरे का नाम आने से महाराष्ट्र की राजनीति गरम
दिशा सालियन की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है और इस बार इसकी गूंज महाराष्ट्र की राजनीति में भी सुनाई दे रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दिशा सालियन की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस एफआईआर में शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जानी है। आदित्य ठाकरे का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
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आदित्य ठाकरे का नाम आने के बाद क्यों गरमाई राजनीति?
टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिशा सालियन केस में सीबीआई की एफआईआर के बाद आदित्य ठाकरे एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। मामले ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ लिया है क्योंकि दिशा सालियन की मौत को लेकर पिछले कई सालों से अलग-अलग तरह के सवाल और दावे सामने आते रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस मामले में सावधानी बरतने की बात कही है। उनका कहना है कि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक किसी को आरोपी मानकर नहीं चला जाना चाहिए। यानी एफआईआर में किसी का नाम होना अंतिम तौर पर उसके खिलाफ अपराध साबित नहीं करता।
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CBI की FIR में कई बड़े नाम
सीबीआई की एफआईआर में आदित्य ठाकरे के अलावा रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डीनो मोरिया, सूरज पंचोली, रोहन रॉय और आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, डीसीपी विशाल ठाकुर और पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री अनिल देशमुख समेत कई पुलिस अधिकारियों, फॉरेंसिक अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। एफआईआर में कथित साजिश, कथित फर्जी आत्महत्या की कहानी तैयार किए जाने और सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें हेरफेर किए जाने जैसे आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच की बात कही गई है। हालांकि इन सभी आरोपों की अभी जांच होनी है और इन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
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2020 में हुई थी दिशा सालियन की मौत
दिशा सालियन बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट यानी एडीआर दर्ज की थी। पुलिस की शुरुआती जांच में उनकी मौत को आत्महत्या माना गया था और उस समय किसी तरह के फाउल प्ले के सबूत नहीं मिलने की बात कही गई थी। बाद में महाराष्ट्र सरकार की ओर से बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने भी फाउल प्ले नहीं मिलने की बात कही थी।
दिशा की मौत के कुछ ही दिनों बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच कुछ ही दिनों का अंतर होने की वजह से सोशल मीडिया और पब्लिक डिबेट में दोनों मामलों के बीच संभावित कनेक्शन को लेकर लंबे समय तक चर्चा होती रही, हालांकि दोनों मामलों की जांच अलग-अलग हुई थी।
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दिशा के पिता ने उठाए थे गंभीर सवाल
दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन लंबे समय से अपनी बेटी की मौत को लेकर अलग जांच की मांग करते रहे हैं। उन्होंने अपनी शिकायत और बाद में जांच एजेंसियों के सामने दिए बयान में कई लोगों के नाम लिए और उनके रोल की जांच करने की मांग की। सतीश सालियन ने जांच अधिकारियों को बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के साथ हुई घटनाओं से जुड़ी जानकारी और उन लोगों के नाम दिए हैं, जिनकी भूमिका की जांच वह चाहते हैं। उन्होंने आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया और बॉडीगार्ड्स समेत कई लोगों के नाम बताए थे।
बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI जांच
दिशा सालियन केस में सीबीआई की एंट्री बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद हुई है। कोर्ट ने मामले की जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा था कि छह साल तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई और सिर्फ एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। कोर्ट ने जांच में मौजूद कुछ विसंगतियों पर भी सवाल उठाए थे और कहा था कि पुलिस की जांच कई सवालों को सुलझाने के बजाय और सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया था कि दिशा के परिवार को उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एडीआर की कॉपी इतने लंबे समय बाद भी क्यों नहीं दी गई।
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आदित्य ठाकरे पर अब क्या है सवाल?
सीबीआई की एफआईआर के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि जांच आगे बढ़ने पर आदित्य ठाकरे और अन्य नामित लोगों की भूमिका को लेकर क्या सामने आता है। फिलहाल सीबीआई जांच शुरुआती चरण में है और एजेंसी को एफआईआर में दर्ज आरोपों और दावों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) की तरफ से भी यह बात कही जा रही है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। टेलीग्राफ इंडिया के मुताबिक संजय राउत ने भी इसी बात पर जोर दिया कि जांच पूरी होने तक किसी को आरोपी मानकर नहीं चलना चाहिए।
सूरज पंचोली ने भी आरोपों पर दी प्रतिक्रिया
सीबीआई की एफआईआर में नाम सामने आने के बाद एक्टर सूरज पंचोली ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दिशा सालियन या आदित्य ठाकरे से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया और कहा कि उन्होंने न तो दिशा से मुलाकात की थी और न ही आदित्य ठाकरे से। उन्होंने यह भी कहा कि वह जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। सूरज ने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को तथ्य मानकर किसी की छवि खराब न की जाए। उन्होंने निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आने की बात कही।
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अब CBI जांच से सामने आएगा सच?
दिशा सालियन केस में सीबीआई की एफआईआर ने करीब छह साल पुराने मामले को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ दिशा के परिवार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ पहले की पुलिस जांच में उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था। अब सीबीआई को पुराने रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम, पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और मामले से जुड़े लोगों की भूमिका की नए सिरे से जांच करनी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि दिशा सालियन की मौत के पीछे वास्तव में क्या हुआ था और एफआईआर में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम होना दोष साबित होने के बराबर नहीं है।
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