
‘दृश्यम’ की दुनिया में सबसे बड़ा सवाल हमेशा यही रहा है कि विजय सलगांवकर कानून से एक कदम आगे कैसे रहता है। ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ इसी सवाल को कहानी के आखिरी पड़ाव तक ले जाती है। फिल्म पुराने फॉर्मूले को सिर्फ दोहराने के बजाय फ्रेंचाइजी की दुनिया में नए टकराव जोड़ती है। अजय देवगन फिर विजय के किरदार में हैं, जबकि जयदीप अहलावत का नया किरदार कहानी में दबाव बढ़ाता है। तब्बू, श्रिया सरन और प्रकाश राज भी अहम हिस्से में हैं। जानिए कैसी है 'दृश्यम द कन्क्लूजन'?
फिल्म की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां विजय सलगांवकर और उसका परिवार अपने पुराने राज को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार खतरा सिर्फ शक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पुराने मामले को खोलने की कोशिश और तेज होती है। नए किरदार कहानी में दबाव बढ़ाते हैं और विजय को एक बार फिर अपनी चालाकी का इस्तेमाल करना पड़ता है। फिल्म का फोकस रहस्य, परिवार, बदले और कानून के बीच चल रही मानसिक जंग पर है। मेकर्स ने इसे हिंदी फ्रेंचाइजी का अंतिम चैप्टर बताया है।
अजय देवगन का विजय सलगांवकर वाला किरदार अब इस फ्रेंचाइजी की पहचान बन चुका है और यहां भी उनका प्रदर्शन ज्यादा शोर किए बिना तनाव पैदा करता है। दूसरी तरफ जयदीप अहलावत कहानी में नया खतरा लेकर आते हैं। दोनों के बीच पहले हाफ का टकराव फिल्म के सबसे बड़े हाई-पॉइंट्स में शामिल है। तब्बू के किरदार में गुस्सा, चोट और बदले की भावना कहानी को भावनात्मक वजन देती है, जबकि प्रकाश राज की मौजूदगी स्क्रीन पर अलग तरह का दबाव बनाती है। श्रिया सरन और बाकी कलाकार भी अपने हिस्से में कहानी को संभालते हैं।
अभिषेक पाठक के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि तीसरे पार्ट को सिर्फ पुराने दो चैप्टर्स की कॉपी न बनाया जाए। निर्देशन और लेखन फिल्म के मजबूत स्तम्भ हैं। खास बात यह है कि कहानी पुराने ‘दृश्यम’ फॉर्मूले को दोहराने की बजाय नए संघर्ष की ओर बढ़ती दिखाई देती है। कोर्टरूम वाला हिस्सा भी तनाव को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। पाठक ने यह भी कहा है कि तीसरी फिल्म के बाद विजय सलगांवकर की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए कोई नया ट्विस्ट नहीं रखा जाएगा।
‘दृश्यम’ जैसी सस्पेंस-प्रधान फिल्म में गाने कहानी की जरूरत नहीं होते और यहां भी बैकग्राउंड म्यूजिक ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। बैकग्राउंड स्कोर तनाव और ड्रामा बढ़ाने वाला है। फिल्म के म्यूजिक से जुड़े नामों में रवि बसरूर, रोचक कोहली और कर्मा हैं, जबकि बैकग्राउंड स्कोर अमर मोहिले ने तैयार किया है। यानी यहां संगीत का मकसद कहानी रोकना नहीं, बल्कि रहस्य और टेंशन को और ऊपर ले जाना है।
फिल्म का असली टेक्निकल गेम एडिटिंग, कैमरा, साउंड और सस्पेंस की टाइमिंग में दिखाई देता है। कोर्टरूम सीक्वेंस और आमने-सामने वाले दृश्यों को कहानी की गति बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया गया है। आधिकारिक टीम में डीओपी सुधीर कुमार चौधरी, एडिटर संदीप फ्रांसिस और साउंड डिजाइनर बेयलॉन फोंसेका शामिल हैं। स्क्रीनप्ले आमिल कीयान खान, अभिषेक पाठक और परवेज शेख ने लिखा है।
‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी के फैंस के लिए यह फिल्म इसलिए खास है क्योंकि यह विजय सलगांवकर की कहानी को अंतिम पड़ाव तक ले जाती है। अजय देवगन-जयदीप का आमना-सामना, कोर्टरूम ड्रामा और क्लाइमैक्स शुरुआती प्रतिक्रियाओं में सबसे ज्यादा उभरे हैं। दूसरी तरफ, जो दर्शक पहले दोनों पार्ट नहीं देख चुके हैं, उनके लिए किरदारों और पुराने घटनाक्रम को समझने में थोड़ा समय लग सकता है। इसलिए इसे देखने से पहले पिछली फिल्मों की कहानी याद कर लेना अनुभव को ज्यादा आसान बना सकता है। हमारी ओर से फिल्म को 5 में से 4 स्टार।
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