
स्टारलिंक लाइसेंस को लेकर एलन मस्क और भारत के बीच जो बहस छिड़ी है, उसमें अब बॉलीवुड के दो बड़े नाम भी कूद पड़े हैं। कमल हासन ने एलन मस्क को सीधा जवाब दिया और कंगना रनौत ने कमल हासन का साथ दिया। मस्क ने भारत में स्टारलिंक की मंजूरी में देरी पर सवाल उठाए थे और कुछ घरेलू व्यापारिक हितों का जिक्र भी किया था। कमल हासन ने साफ कहा कि कोई अरबपति किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता—चाहे वो भारतीय हो या अमेरिकी। कंगना ने इसे तीखा, सटीक और व्यंग्यात्मक बताते हुए लिखा, ‘ओउच!! ये तो चुभने वाली बात होगी।’ पूरा मामला सिर्फ इंटरनेट सेवा का नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और फैसले खुद लेने के अधिकार का बन गया है।
एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्टारलिंक दुनिया के कई देशों में काम कर रहा है, फिर भारत में इतना समय क्यों लग रहा है। साथ ही उन्होंने घरेलू व्यापारिक हितों के प्रभाव का भी इशारा किया। स्टारलिंक स्पेसएक्स का सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस है जो कम ऊंचाई वाले उपग्रहों के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराता है। दूरदराज के इलाकों में जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड पहुंचाना मुश्किल है, वहां ये विकल्प बन सकता है। लेकिन भारत में किसी भी ऐसी सेवा को शुरू करने से पहले दूरसंचार नियमों और सुरक्षा संबंधी शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है।
कमल हासन ने एक्स पर मस्क को संबोधित करते हुए लिखा कि कोई अरबपति किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता—चाहे वो भारतीय हो या अमेरिकी। उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र है, कोई कॉलोनी नहीं। हम दुनिया का स्वागत करते हैं, लेकिन अपना भविष्य हम भारतीय खुद तय करेंगे। पश्चिमी हितों, दोहरे मानदंडों या किसी अरबपति के दबाव में नहीं। कमल हासन ने सैटेलाइट इंटरनेट में प्रतिस्पर्धा का स्वागत भी किया, लेकिन सस्ता और व्यावहारिक समाधान तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका जोर इस बात पर था कि फैसला देश के लोग और उनकी चुनी हुई सरकार लेंगे।
कंगना रनौत ने कमल हासन के जवाब को सराहा। उन्होंने लिखा, “ओउच!! ये तो चुभने वाली बात होगी।” फिर आगे कहा कि कोई अरबपति किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता—भारतीय हो या अमेरिकी। बात अच्छी कही और अच्छे से समझाई। तीखी, सटीक और व्यंग्यात्मक। कंगना ने कमल हासन के रुख का समर्थन करते हुए देश की नीति पर किसी बाहरी दबाव को गलत बताया। दोनों की टिप्पणियों ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।
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स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट इंटरनेट से दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ सकती है। जहां केबल या टावर लगाना मुश्किल है, वहां ये विकल्प काम आ सकता है। लेकिन कीमत, उपकरण की लागत और सुरक्षा के पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार ने पहले ही कुछ कंपनियों को लाइसेंस दिए हैं, लेकिन व्यावसायिक सेवा शुरू करने से पहले सुरक्षा आकलन और स्पेक्ट्रम संबंधी मंजूरी पूरी करनी होती है। प्रतिस्पर्धा और किफायती सेवा दोनों जरूरी हैं ताकि आम लोग भी इसका फायदा उठा सकें।
ये पूरा विवाद सिर्फ एक कंपनी के लाइसेंस का नहीं रह गया है। इसमें बड़े सवाल जुड़ गए हैं—क्या कोई अरबपति किसी देश की नीति प्रभावित कर सकता है? भारत जैसे लोकतंत्र में फैसले जनता और उसकी सरकार के हाथ में होने चाहिए। कमल हासन और कंगना रनौत दोनों ने यही बात दोहराई। विदेशी निवेश और तकनीक का स्वागत है, लेकिन शर्तों पर नहीं। देश अपनी प्राथमिकताएं खुद तय करेगा। ये बहस आगे भी जारी रह सकती है क्योंकि सैटेलाइट इंटरनेट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
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