मिथुन चक्रवर्ती की आज की पहचान किसी परिचय की मोहताज नहीं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर बेहद मुश्किल था। फराह खान के साथ बातचीत में उनकी जिंदगी के संघर्ष का ऐसा किस्सा सामने आया, जिसे सुनकर हर कोई सोचने पर मजबूर हो सकता है।
मिथुन चक्रवर्ती आज भारतीय सिनेमा के बड़े नामों में गिने जाते हैं, लेकिन इंडस्ट्री में उनका शुरुआती सफर बिल्कुल आसान नहीं था। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में 350 से अधिक फिल्मों का हिस्सा बनने वाले मिथुन ने हिंदी, बंगाली और कई क्षेत्रीय भाषाओं में काम किया है। फराह खान के लेटेस्ट व्लॉग में उनके साथ हुई बातचीत ने उनके संघर्ष के उस दौर को फिर सामने ला दिया, जब स्टारडम तो दूर, इंडस्ट्री में टिकना ही बड़ी चुनौती था।
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फराह खान ने सुनाया मिथुन की जिंदगी का अनसुना किस्सा
फराह खान ने बताया कि जब वह छोटी थीं, तब उनके अंकल केके शुक्ला अमिताभ बच्चन के लिए फिल्में लिखा करते थे। फराह के मुताबिक, मिथुन के पिता उन पार्टियों में सिर्फ इसलिए डांस करने आते थे ताकि रात में खाना मिल सके। उन्होंने कहा, “वह कुछ भी चार्ज नहीं करते थे, बदले में उन्हें अपने परफॉर्मेंस के लिए रात का खाना मिल जाता था। वह संघर्ष कुछ और ही था। लोग यूं ही संघर्ष शब्द का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन असली संघर्ष ऐसा दिखता है।”
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मिथुन बोले- ये सिर्फ संघर्ष नहीं, उससे भी आगे की कहानी है
फराह की बात पर मिथुन चक्रवर्ती ने अपने शुरुआती दिनों की मुश्किलों को और खुलकर याद किया। उन्होंने कहा, “यह संघर्ष से भी आगे की बात है। मेरा मतलब है कि वह सड़कों पर, फुटपाथ पर सो चुका है। मैं सड़क पर, बगीचे में सोया हूं। कई बार चलते-चलते इतना थक जाता था कि फुटपाथ पर ही सो जाता था। जब मेरी आंख खुलती थी, तो मैं खुद को फुटपाथ पर पाता था।”
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जूनियर आर्टिस्ट से मेगास्टार बनने तक का सफर
फराह खान ने मिथुन की जर्नी को याद करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि वह इकलौते ऐसे स्टार हैं, जो जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर अपनी यात्रा शुरू करने के बाद मेगास्टार बने।” मिथुन ने 1976 में मृणाल सेन की नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्म मृगया से एक्टिंग करियर शुरू किया था। इसके बाद 1979 की स्पाई थ्रिलर 'सुरक्षा' ने उनकी स्टारडम की नींव मजबूत की और 80 के दशक में उनकी पहचान तेजी से बड़ी।
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Disco Dancer से 80s के सुपरस्टार तक, फिर नहीं रुके मिथुन
'सुरक्षा' के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने 80 के दशक में 'डिस्को डांसर', 'डांस डांस', 'प्यार झुकता नहीं', 'कसम पैदा करने वाले की' और 'कमांडो' जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई। यह उनके करियर का बेहद व्यस्त दौर था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस दशक में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और कई बार एक ही दिन में चार फिल्मों की शूटिंग तक संभाली। इसी दौरान उन्होंने बॉलीवुड के साथ बंगाली सिनेमा में भी लगातार काम जारी रखा।
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350+ फिल्मों से नेशनल अवॉर्ड और पद्म भूषण तक
मिथुन चक्रवर्ती का जन्म 16 जून 1950 को गौरांग चक्रवर्ती के रूप में हुआ था। वह एक्टर के साथ प्रोड्यूसर और एंटरप्रेन्योर भी हैं। उन्होंने हिंदी, बंगाली, भोजपुरी, तेलुगु, ओड़िया, तमिल, कन्नड़ और पंजाबी सिनेमा में 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। ‘महागुरु’ के नाम से मशहूर मिथुन तीन बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड और चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीत चुके हैं। 2024 में उन्हें पद्म भूषण मिला और भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।
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