
Nana Patekar O Romeo: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने अपना एक बेहद दमदार कलाकार खो दिया। 75 साल की उम्र में गोवा स्थित अपने आवास पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हो गया। करीब पांच दशक लंबे करियर में नाना ने गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी और एक्शन तक हर तरह के किरदारों में अपनी अलग पहचान बनाई।
लेकिन उनके निधन के साथ एक सवाल यह भी है कि आखिरी बार नाना पाटेकर पर्दे पर किन किरदारों में नजर आए थे? उनके करियर के अंतिम दौर में फिल्म, थिएटर और ओटीटी—तीनों माध्यमों में उनकी मौजूदगी बनी रही।
नाना पाटेकर की आखिरी रिलीज हुई फिल्म 'सूबेदार' थी। इस फिल्म में उन्होंने खास भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनके पुराने को-स्टार अनिल कपूर के साथ उनकी स्क्रीन मौजूदगी ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। नाना और अनिल कपूर इससे पहले 'परिंदा', 'वेलकम' और 'वेलकम बैक' जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके थे। ऐसे में 'सूबेदार' में दोनों की मौजूदगी उनके पुराने फिल्मी सफर की याद भी ताजा करती है। उनकी आखिरी स्क्रीन परफॉर्मेंस के तौर पर 'सूबेदार' का जिक्र कई रिपोर्ट्स में किया गया है।
'सूबेदार' से पहले नाना पाटेकर विशाल भारद्वाज की फिल्म 'ओ रोमियो' में नजर आए थे। यह उनकी आखिरी सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्म थी। फिल्म में उन्होंने DCP इस्माइल खान का किरदार निभाया। शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी स्टारर इस क्राइम-ड्रामा में नाना का किरदार कहानी को एक अलग वजन देता है। लंबे करियर में पुलिस अधिकारी के कई यादगार किरदार निभाने वाले नाना के लिए यह भूमिका भी खास रही। यह फिल्म नाना पाटेकर और विशाल भारद्वाज का पहला फिल्मी सहयोग भी था।
नाना पाटेकर का अंतिम दौर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने ओटीटी और सीरीज में भी काम किया। 'संकल्प' में उन्होंने कन्हैयालाल की भूमिका निभाई। इस प्रोजेक्ट के जरिए नाना ने अपने करियर के आखिरी दौर में भी अलग तरह के किरदारों के साथ प्रयोग जारी रखा। यही उनकी अभिनय यात्रा की खासियत रही—वह किसी एक तरह की भूमिका या माध्यम तक खुद को सीमित नहीं करते थे।
नाना पाटेकर ने 1978 में 'गमन' से फिल्मी सफर शुरू किया था। इसके बाद 'परिंदा', 'सलाम बॉम्बे!', 'क्रांतिवीर', 'अग्निसाक्षी', 'अब तक छप्पन', 'अपहरण', 'राजनीति', 'वेलकम' और 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाईं। गंभीर अभिनय, दमदार संवाद अदायगी और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की उनकी शैली ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दी। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। नाना पाटेकर के निधन के साथ उनका ऑन-स्क्रीन सफर भले थम गया हो, लेकिन 'सूबेदार', 'ओ रोमियो' और उनके दशकों लंबे फिल्मी करियर के किरदार आने वाले समय में भी उन्हें दर्शकों के बीच जिंदा रखेंगे।
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