
Nana Patekar News: सिनेमा के सबसे बेबाक और दमदार अभिनेताओं में शुमार नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में गुरुवार, 8 अक्टूबर तड़के गोवा में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। इस दुखद खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। ये वीडियो उनके निधन से ठीक 3 दिन पहले यानी 5 अक्टूबर का है, जब नाना पाटेकर आखिरी बार किसी सार्वजनिक मंच पर नजर आए थे। उस दिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि पर्दे पर अपनी गरजदार आवाज से जान फूंकने वाला ये कलाकार कुछ ही घंटों बाद हमेशा के लिए खामोश हो जाएगा।
5 अक्टूबर को नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला इलाके में 'सम्राट क्लब इंटरनेशनल' के एक इंस्टॉलेशन प्रोग्राम में पहुंचे थे। मंच पर उनका वही जाना-पहचाना सादा अंदाज, चेहरे पर हल्की मुस्कान और सादगी नजर आ रही थी। जब उन्होंने माइक हाथ में लिया, तो उन्होंने हमेशा की तरह जिंदगी, इंसानी रिश्तों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी पर सीधी और दो-टूक बातें कहीं। नाना ने अपने उसी खास लहजे में कहा कि इंसान को हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहिए और जितना हो सके, दूसरों के काम आना चाहिए। वीडियो में वह बिल्कुल सहज, एक्टिव और स्वस्थ दिख रहे थे। वहां मौजूद किसी भी शख्स को यह अहसास तक नहीं था कि यह उनकी आखिरी पब्लिक स्पीच साबित होगी। सुनिए उनका पूरा वीडियो...
VIDEO | Goa: Actor Nana Patekar attended and addressed the Samraat Club International installation ceremony in Dona Paula.
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) https://t.co/jl8xn9vXOk
— Press Trust of India (@PTI_News) October 4, 2026
5 अक्टूबर के उस मुस्कराते चेहरे के बाद 8 अक्टूबर की सुबह एक बड़ा झटका लेकर आई। 8 अक्टूबर की सुबह डोना पाउला स्थित अपने फ्लैट पर नाना पाटेकर अचानक अचेत पाए गए। उन्हें तुरंत पास के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें होश में लाने के लिए लगातार 45 मिनट तक सीपीआर दिया। सुबह 5:10 बजे उनका निधन हो गया। अस्पताल के मुताबिक, मामले में औपचारिक मेडिको-लीगल प्रक्रिया और पोस्टमॉर्टम का नियम पूरा किया जा रहा है, ताकि मृत्यु की सही मेडिकल वजह रिकॉर्ड में दर्ज हो सके।
नाना पाटेकर सिर्फ फिल्मों के बड़े नाम नहीं थे, उनका कद रील लाइफ से कहीं ज्यादा रियल लाइफ में बड़ा था। करोड़ों रुपए कमाने के बावजूद वह बेहद सामान्य तरीके से रहे। उनका दिल हमेशा गांव और मिट्टी से जुड़ा रहा। जब महाराष्ट्र के किसान सूखे और कर्ज से जूझ रहे थे, तब नाना ने अपनी 'नाम फाउंडेशन' के जरिए खुद गांवों में जाकर परिवारों को सहारा दिया। पर्दे पर सबको हंसाने और ललकारने वाले नाना ने अपने जीवन में बड़े बेटे दुर्वासा को खोने का गहरा दर्द झेला था, जिसने उन्हें भीतर से हमेशा के लिए बदल दिया था। चाहे 'परिंदा' और 'क्रांतिवीर' की तीखी एक्टिंग हो या 'वेलकम' का यादगार 'उदय शेट्टी', नाना ने हर किरदार को अमर बना दिया।
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