
मेगास्टार चिरंजीवी (Megastar Chiranjeevi) की ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म इंद्र (Indra). इस फिल्म को मेगास्टार के जन्मदिन के उपलक्ष में गुरुवार (22 अगस्त) को इंद्र को री-रिलीज़ किया गया। चिरंजीवी के करियर की यादगार फिल्मों में से एक होने के कारण, प्रशंसकों ने सिनेमाघरों में इस फिल्म का जश्न मनाया। री-रिलीज़ को भी सीधे रिलीज़ की तरह सेलिब्रेट किया गया। इसी पृष्ठभूमि में फिल्म से जुड़ी कई दिलचस्प बातें सामने आ रही हैं।
उन्हीं में से एक है इस फिल्म का एक पूरा एपिसोड चिरंजीवी ने खुद डायरेक्ट किया था। इस फिल्म के निर्देशक भले ही बी गोपाल थे, लेकिन उन्होंने सारे सीन खुद नहीं शूट किए थे। इंद्र फिल्म के सबसे दमदार एपिसोड्स में से एक, फ्लैशबैक एपिसोड को चिरंजीवी ने ही निर्देशित किया था। कैसे हुआ ये सब...
इंद्र की शूटिंग के दौरान ही बी गोपाल को प्रभास की फिल्म अडवी रामुडू की शूटिंग भी करनी थी। जिसके चलते डेट्स क्लैश हो रही थीं। ऐसे में बी.गोपाल परेशान हो रहे थे तो चिरंजीवी ने हिम्मत दिखाते हुए फ्लैशबैक एपिसोड को खुद डायरेक्ट करने का फैसला लिया। ये बात बहुत कम लोग जानते हैं।
इसके अलावा फिल्म से जुड़ी कुछ और बातें इस प्रकार हैं... फिल्म के क्लाइमेक्स में विलेन मुकेश ऋषि को चिरंजीवी बुरी तरह से पीटते हैं। लोग उठकर यह सोचकर बाहर जाने लगते हैं कि फिल्म खत्म हो गई है, उस समय इतने लंबे डायलॉग बोलने का क्या मतलब है, क्या लोग वाकई में सुनेंगे? चिरंजीवी को यह शंका हुई। उन्होंने पूछा कि विलेन को पीटने के बाद भी मैं अगर तीन पेज के डायलॉग बोलूँगा तो क्या ठीक रहेगा?
उस फिल्म के निर्देशक बी.गोपाल थे लेकिन ...मजेदार बात यह है कि क्लाइमेक्स फाइट सीन को पరుचुरी गोपालकृष्ण ने निर्देशित किया था। विलेन मुकेश ऋषि को पीटने के बाद चिरंजीवी को तीन पेज के डायलॉग बोलने थे। वे डायलॉग जिन्हें उन्होंने बड़ी मेहनत और लगन से लिखा था। लेकिन विलेन को पीटने के बाद डायलॉग बोलना चिरंजीवी को ठीक नहीं लगा। उन्हें लगा कि स्क्रिप्ट लिखते समय जो एहसास था, वह अलग है और यहाँ व्यावहारिक रूप से इसे फिल्माते समय जो व्यावहारिकता है, वह अलग है। तीन पेज के डायलॉग लोग सुनेंगे नहीं। इसे छोटा करके एक ही वाक्य में कहना होगा। ऐसा सोचते हुए उन्होंने तुरंत पेन और पेपर लिया और कुछ ही मिनटों में एक शानदार डायलॉग लिखकर चिरंजीवी को दिया। वह डायलॉग था.. ‘नर्क में भी जायेगा तो जंगल कहलाएगा, चींटी को रौंदने वाला इंसान नहीं कहलाता’
फिल्म का पूरा सार उस एक डायलॉग में समा गया। उस डायलॉग के साथ फिल्म खत्म हो गई। अगर चिरंजीवी को वह शंका न होती, या होती भी और वे झिझकते तो क्लाइमेक्स कुछ और ही होता।
इसी तरह फिल्म में एक और जगह...चिरंजीवी को एक शंका हुई। अपने भांजे के लिए चिरंजीवी को भाषा टाइप में मार खानी पड़ती है। चूँकि वे मेगास्टार हैं, उन्हें शंका हुई कि क्या उनके प्रशंसक इसे स्वीकार करेंगे? दूसरी तरफ एक कलाकार होने के नाते उन्हें ऐसा करना ही था... इस पर उन्होंने पार्चुरी ब्रदर्स को बुलाया और कहा कि ‘मैं अपने भांजे के लिए मार खा रहा हूँ, क्या मेरे फैंस इस सीन को पसंद करेंगे?’ तब पार्चुरी ब्रदर्स ने इस समस्या का समाधान निकाला....उन्होंने एक डायलॉग लिखा और कहा कि यही है जवाब...
"शाहरुख़ खान.. गलती मेरी तरफ से हुई है इसलिए मैं सिर झुकाकर जा रहा हूँ। वरना यहाँ से सर कलम करके जाता."
इस एक डायलॉग से पूरा सीन जस्टिफाइड हो गया। साथ ही फिल्म में और भी कई दमदार डायलॉग थे.. जैसे "आना भूल गए क्या? काशी चले गए, साधू बन गए क्या? वाराणसी में रहकर अपनी औलाद बदल दी क्या? वही खून, वही ताकत." ,"वीरशंकर रेड्डी.. पेड़ कभी नहीं पूछता कि कौन काट रहा है" जैसे कई डायलॉग ने सिनेमाघरों में धूम मचा दी थी।
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