Fact Check: क्या क्रैश हुए तेजस जेट को नहीं मिला था क्लियरेंस, जानें वायरल दावे का सच

Published : Nov 25, 2025, 05:52 PM IST
Tejas Crash Fact check

सार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया कि तेजस जेट को उड़ान की अनुमति नहीं थी। जांच में साबित हुआ कि यह डीपफेक वीडियो है। रियल वीडियो में ऐसी किसी बात का जिक्र नहीं किया गया था।

Fake Check: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चल रहे एक वीडियो में दावा किया गया है कि एक टीवी चैनल के एंकर अभिषेक सेनगुप्ता एक इंटरनल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि हाल ही में दुबई एयर शो में हुए क्रैश में शामिल तेजस फाइटर जेट को टेक्निकली उड़ान भरने की परमिशन नहीं दी गई थी। हालांकि, शेयर किए गए वीडियो में में डिजिटल तरीके से छेड़छाड़ की गई है। डीपफेक डिटेक्शन टूल्स ने AI के जरिये वीडियो में हेरफेर की संभावना बताई है। वहीं, ओरिजिनल रिपोर्ट में ऐसी कोई बात नहीं है।

वायरल क्लिप में क्या किया जा रहा दावा

यूजर @Baba_Thoka ने एक क्लिप (आर्काइव) शेयर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि टीवी चैनल ने गलती से सच बोल दिया और उसके एंकर ने बताया कि तेजस जेट को हवा में उड़ान भरने की परमिशन दे दी गई, जबकि उसे टेक्निकली उड़ान भरने की इजाजत नहीं थी। वीडियो में सेनगुप्ता को एक एक्सपो से बोलते हुए दिखाया गया है, जिसमें स्क्रीन पर NDTV वर्ल्ड का लोगो नजर आ रहा है। इस वीडियो को अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक पर भी इसी दावे के साथ शेयर किया गया है। बाद में यूजर ने अपने अकाउंट से शेयर किए गए वीडियो को हटा लिया है।

क्या है सच्चाई?

वायरल वीडियो की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि इसे वीडियो AI से मैनिपुलेट किया गया है और यह ऑरिजिनल रिपोर्ट के कंटेंट को नहीं दिखाता है। ओरिजिनल ब्रॉडकास्ट में ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है। फुटेज को जब 21 नवंबर, 2025 की रिपोर्ट से ट्रेस किया तो पता चला कि ऑरिजिनल वीडियो में एंकर शुरुआती असेसमेंट पर चर्चा करते हैं। उस वीडियो में क्लियरेंस इशू का कोई जिक्र नहीं है। 

एंकर के भाषण और चेहरे के हाव-भाव का डिफरेंट पैटर्न

वायरल क्लिप में एंकर का भाषण रिपिटेटिव और रिजिड डिलीवरी वाला है। इसके अलावा आंखों की अनियमित एक्टिविटी और चेहरे के हाव-भाव नेचुरल ह्यूमन मोशन के साथ बेमेल नजर आते हैं। इससे जाहिर है कि इसमें एआई से हेरफेर किया गया है। इसके अलावा डीपफेक-ओ-मीटर के जरिये ऑडियो और वीडियो को अलग-अलग चलाकर देखने पर पता चला कि AI के इस्तेमाल से विजुअल और ऑडियो दोनों में ही मैनिपुलेशन किया गया था।

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