उज्जैन. ब्रह्मवैवर्त एक वैष्णव पुराण है। इस पुराण में चार खंड हैं। पहला खंड ब्रह्म खंड है, दूसरा प्रकृति खंड है, तीसरा गणपति खंड है और चौथा श्रीकृष्ण जन्म खंड है। इस पुराण में पूजा-पाठ और सुखी जीवन के लिए कुछ खास सूत्र बताए गए हैं। यहां जानिए ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार किसी भी पूजन कर्म में कौन-कौन सी चीजें सीधे जमीन पर नहीं रखकर कहां रखनी चाहिए…
दीपक- दीपक के नीचे थोड़े से चावल रखने चाहिए या लकड़ी के बाजोट पर दीपक स्थापित करना चाहिए।
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शंख- शंख को लकड़ी के बाजोट पर या साफ़ कपड़ें पर रखना चाहिए।
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यज्ञोपवीत (जनेऊ)- जनेऊ को साफ़ कपड़ें पर रखना चाहिए, क्योंकि ये देवताओं को मुख्य रूप से अर्पित की जाती है।
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देवी-देवताओं की मूर्तियां- लकड़ी या सोने-चांदी के सिंहासन या बाजोट पर थोड़े से चावल रखकर उसके ऊपर देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित करनी चाहिए।
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शालिग्राम- शालिग्राम को साफ़ रेशमी कपड़ें पर रखना चाहिए, क्योंकि ये भगवान विष्णु के स्वरूप हैं।
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सुपारी- पूजा में उपयोग की जाने वाली सुपारी को सिक्के के ऊपर रखना चाहिए।
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देवी-देवताओं के वस्त्र और आभूषण- जमीन पर वस्त्र रखने से वो गंदे हो जाते है। भगवान को हमेशा पवित्र वस्त्र ही अर्पित करने चाहिए इसलिए वस्त्र और आभूषण को भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए।
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मणि- यदि आप पूजा में कोई मणि या रत्न रखना चाहते हैं तो इसे भी किसी साफ़ कपड़ें पर रखना चाहिए।
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