उज्जैन. धर्म ग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को रंगों की त्योहार मनाया जाता है। इस बार होली 29 मार्च, सोमवार को है। दुनिया भर में भारत को उसकी संस्कृति व विविधताओं के लिए जाना जाता है। यहां का हर त्योहार मानव सभ्यता को कुछ न कुछ संदेश देता है। होली भी इन्हीं त्योहारों में से एक है। इस पर्व में भी लाइफ मैनेजमेंट के अनेक सूत्र छिपे हैं, जो हमें सीखाते हैं कि किस तरह हम अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। आगे जानिए होली के पीछे छिपे लाइफ मैनेजमेंट के सूत्रों के बारे में…
1. लाइफ में संतुलन है बहुत जरूरी
ये तो सब जानते हैं कि होली रंगों से खेली और मनाई जाती है, लेकिन रंगों से ही क्यों? इसका कारण है कि पृथ्वी पर सारा जीवन सूर्य पर निर्भर है। सूर्य अपनी रोशनी व ऊर्जा को सात रंगों में पृथ्वी पर न्यौछावर करता है। यदि सात में से एक भी रंग घट या बढ़ जाए तो पृथ्वी की सारी व्यवस्था ही बिगड़ जाए। रंगों का निश्चित संतुलन हमें जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन बनाने की अनमोल प्रेरणा देता है।
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2. परिवर्तन का स्वागत करें
होली का पर्व वसंत ऋतु के आगमन की सुखद सूचना है। वसंत ऋतु नवसृजन व नवनिर्माण की ऋतु है। प्रकृति नवसृजन के लिए, परिवर्तन के लिए वसंत ऋतु में एक बेशकीमती मौका हमें देती है। यदि हम जागृत हैं, सजग हैं, तो इसका लाभ उठा सकते हैं। वसंत ऋतु का आगमन हमें सिखाता है कि जीवन में परिवर्तन बहुत जरूरी है।
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3. हम सब एक हैं
जाति, धर्म, रंग-रूप, धन, यश आदि कितनी ही दीवारें इंसान को इंसान से बांटती हैं। इन दीवारों को तोड़कर एक रंग, एक मंच, एक उमंग, एक उत्साह में सराबोर होकर समत्व को अपनाना ही होली का संदेश है। इस त्योहार में सभी लोग ऊंच-नीच और जाति, धर्म को भूलकर एक हो जाते हैं, ये संदेश है कि हम सब एक है।
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