उज्जैन. आज (7 दिसंबर) अगहन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इसे कालभैरव अष्टमी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान शिव ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। कालभैरव अष्टमी पर प्रमुख भैरव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस मौके पर हम आपको प्रमुख भैरव मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है…
वैसे तो भारत में बाबा कालभैरव के अनेक मंदिर है, लेकिन इन सभी में काशी के कालभैरव मंदिर की विशेष मान्यता है। यह काशी के विश्वनाथ मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद जो भक्त इनके दर्शन नहीं करता है उसकी पूजा सफल नहीं मानी जाती है।
25
नैनीताल के समीप घोड़ाखाल का बटुक भैरव मंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है। यह गोलू देवता के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर में विराजित इस श्वेत गोल प्रतिमा की पूजा के लिए प्रतिदिन श्रद्धालु भक्त पहुंचते हैं।
35
बटुक भैरव मंदिर दिल्ली के विनय मार्ग पर स्थित है। बाबा बटुक भैरव की मूर्ति यहां पर विशेष प्रकार से एक कुएं के ऊपर विराजित है। मान्यता है कि यह प्रतिमा पांडव भीमसेन काशी से लाए थे।
45
छत्तीसगढ़ के रतनपुर में आदिशक्ति महामाया कौमारी शक्तिपीठ के रूप में विराजमान है, वहीं उनके रक्षक भैरव नाथ का प्रवेश द्वार पर मंदिर है। यह मंदिर सिद्ध तंत्र पीठ के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित भैरव प्रतिमा 10 फीट ऊंची है जो रौद्र रूप में है।
55
काशी के बाद भारत में दूसरा प्रसिद्ध कालभैरव का मंदिर उज्जैन के क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यहां ऐसी परांपरा है कि लोग भगवान कालभैरव को प्रसाद के रूप शराब का चढ़ाते हैं। एक विशेष पात्र (बर्तन) में शराब लेकर भगवान कालभैरव के मुख पर लगाया जाता है और देखते ही देखते वह पात्र खाली हो जाता है।
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi