उज्जैन. सूर्य के धनु राशि में आते ही खरमास की शुरुआत हो जाती है। इसे धनु संक्रांति भी कहा जाता है। हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक खरमास में किसी भी तरह के मांगलिक-शुभ काम नहीं करने चाहिए। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार, इस साल 16 दिसंबर से 14 जनवरी 2021 तक धनु संक्रांति होने से खरमास रहेगा।
करें भगवान विष्णु का पूजन
खरमास के प्रतिनिधि आराध्य देव भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस माह के दौरान भगवान विष्णु की पूजा नियमित रूप से करना चाहिए। साथ ही विष्णु एवं शालिग्राम का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। भगवान को साज-सज्जा से सुसज्जित कर उन्हें विशेष पकवानों का भोग लगाना चाहिए। प्रभु का नाम स्तवन कर कीर्तन तथा ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय‘ इस मंत्र का प्रतिदिन जप करना चाहिए। तीर्थ में जाकर दान स्नान तथा सूर्य अर्घ देना चाहिए। इस मास में तुलसी की पूजा का भी अधिक महत्व माना गया है। प्रातः जल्दी उठकर तुलसी में दीपक एवं जल से पूजन करना चाहिए और तुलसी की माला से ही भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करना चाहिए।
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क्या करना चाहिए खरमास में?
सूर्योदय से पहले स्नान, संध्या करके भगवान का स्मरण करें। खरमास में सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए। यह महाधर्म, दान, जप, तप का महीना माना जाता है। इसमें अनेक गुणों के साथ लाभ प्राप्त होता है। कर्ता को करने का कई गुना फल प्राप्त होता है। खरमास में ब्राह्मण, गुरु, गाय एवं साधु-सन्यांसियों की सेवा करनी चाहिए।
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दान का महत्व
खरमास महीने में सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए। ऐसा भी माना गया है कि खरमास में दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, इसलिए इस महीने जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना चाहिए। जरूरतमंदों को उनकी आवश्यकता अनुसार जरूरी चीजें भी बांटी जा सकती है। अगहन महीने में अन्न के साथ ही वस्त्र दान भी किया जा सकता है। खरमास में गौ पूजन व गौ संवर्धन करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। भविष्य में किसी भी प्रकार के कार्य में सफलता मिलती है।
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