उज्जैन. इन दिनों पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम है। हालांकि कोरोना के कारण अनेक मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर पाबंदी है। लेकिन इसके बाद भी भक्त अपने घरों पर ही गणपति बप्पा की आराधना में जुटे हैं। इस शुभ अवसर पर हम आपको देश के 10 प्रमुख गणेश मंदिरों के बारे में बता रहे हैं। इन सभी मंदिरों का अपना विशेष महत्व है। जानिए इन गणेश मंदिरों के बारे में…
जयपुर का मोती डूंगरी मंदिर
राजस्थान के जयपुर में मोती डूंगरी गणेश मंदिर है। मंदिर की गणेश प्रतिमा 1761 में जयपुर के राजा माधौसिंह की रानी के पैतृक गांव मावली (गुजरात) से लाई गई थी। 1761 से पहले भी इस प्रतिमा का इतिहास 500 सालों से ज्यादा पुराना माना जाता है। मोती डूंगरी गणेश के प्रति जयपुर के लोगों की गहरी आस्था है। सामान्य तौर पर गणेश उत्सव के दौरान यहां 50 हजार से ज्यादा लोग प्रतिदिन दर्शन करने आते हैं।
210
चित्तूर का कनिपकम गणेश मंदिर
आंध्रप्रदेश में चित्तूर जिले के इरला मंडल में कनिपकम गणेश मंदिर है। मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में चोल राजा कुलोठुन्गा चोल प्रथम ने करवाया था। इसके बाद विजयनगर के राजा ने 1336 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मंदिर की मूर्ति के संबंध मान्यता है कि इसका आकार बढ़ रहा है। हर साल यहां मूर्ति कुछ रत्ती बढ़ जाती है। ये प्रतिमा काले ग्रेनाइट की एक बड़ी चट्टान को ही तराश कर बनाई गई है।
310
पुणे का दगड़ू गणेश मंदिर
महाराष्ट्र के पुणे का दगड़ू गणेश मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इसके निर्माण के संबंध में एक कहानी है कि जब 18वीं शताब्दी में प्लेग महामारी फैली थी, उस समय यहां के एक व्यापारी दगड़ू सेठ हलवाई के बेटे की मौत इस बीमारी की वजह से हो गई थी। इस कारण दगड़ू सेठ और उनकी पत्नी दुःखी रहने लगे थे। तब अपने गुरु माधवनाथ महाराज के कहने पर उन्होंने यहां गणेश मंदिर बनवाया। पहले इसका नाम गणेश मंदिर ही था, लेकिन बाद ये दगड़ू सेठ हलवाई के नाम से ही प्रसिद्ध हो गया। मंदिर में करीब साढ़े फीट ऊंची और चार चौड़ी गणेश प्रतिमा स्थापित है।
410
उज्जैन का चिंतामण मंदिर
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है चिंतामन गणेश मंदिर। मंदिर गणेश के तीन स्वरूपों की प्रतिमाएं हैं। इनमें चिंतामन, इच्छामन, सिद्धिविनायक स्वरूप के दर्शन होते हैं। वर्तमान में मंदिर की जो इमारत है, उसका निर्माण होलकर वंश की महारानी अहिल्याबाई द्वारा करवाया गया था। हालांकि, इसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां तीन गणेश प्रतिमाएं भगवान राम, लक्ष्मण और सीता ने स्थापित की थी। लक्ष्मण ने यहां एक बावड़ी का निर्माण भी किया था, जिसे लक्ष्मण बावड़ी कहा जाता है।
510
गंगटोक का टोक मंदिर
सिक्किम का गंगटोक क्षेत्र बौद्ध धर्म के नजरिए से काफी प्रसिद्ध है। लेकिन, यहां एक बहुत खास गणेश मंदिर भी है, जिसे गणेश टोक मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण करीब 1953 में हुआ था। उस समय भारत के विदेश मंत्रालय में पदस्थ अधिकारी अपा. बी. पंत ने मंदिर बनवाया था। मंदिर के आसपास का क्षेत्र बहुत ही सुंदर है।
610
इंदौर का खजराना गणेश मंदिर
मध्य प्रदेश के इंदौर में खजराना गणेश मंदिर स्थित है। मंदिर में गणेशजी की करीब 3 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। साथ ही, रिद्धि-सिद्धि भी विराजित हैं। मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। 1735 में होलकर वंश की महारानी अहिल्या बाई ने मंदिर को भव्य बनवाया था। ऐसा माना जाता है ये मंदिर कभी तंत्र पूजा का स्थान भी रहा है।
710
केरल का मधुर महागणपति मंदिर
केरल की मधुरवाहिनी नदी के किनारे पर मधुर महागणपति मंदिर स्थित है। इसका इतिहास 10वीं शताब्दी का माना जाता है। मान्यता है कि जब ये शिवजी का मंदिर था, तब यहां पुजारी के साथ उनका बेटा भी रहता था। एक दिन पुजारी के बेटे ने मंदिर की दीवार पर गणेशजी का चित्र बना दिया। कुछ समय बाद चित्र का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगा और चित्र मूर्ति जैसा दिखने लगा। दीवार पर चमत्कारी रूप से उभरी इस प्रतिमा को देखने के लिए लोग आने लगे। दीवार पर उभरी प्रतिमा की वजह से ये शिव मंदिर की जगह भगवान गणेश का मंदिर बन गया।
810
मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर
महाराष्ट्र के मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर करीब 219 साल पुराना है। इसकी स्थापना 19 नवंबर 1801 को हुई थी। मंदिर के अंदर एक छोटे मंडप में सिद्धिविनायक प्रतिमा है। इसकी छत पर करीब 3.5 किलो का सोने का कलश लगा हुआ है। छत के अंदर की तरफ भी सोने का लेप किया हुआ है। ये मंदिर पांच मंजिला है और करीब 20 हजार वर्गफीट में फैला हुआ है। सिद्धिविनायक की मूर्ति काले पत्थर को तराशकर बनाई हुई है।
910
रणथंबोर का त्रिनेत्र गणेश मंदिर
राजस्थान के सवाई माधौपुर के पास रणथंबोर किले में गणेशजी का एक प्राचीन मंदिर है। इसे त्रिनेत्र गणेश मंदिर कहते हैं। मंदिर में रिद्धि-सिद्धि के साथ गणेशजी की त्रिनेत्र वाली प्रतिमा है। मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी का है। उस समय राजा हमीर ने इस मंदिर को बनवाया था। रणथंबोर गणेशजी को हर रोज भक्तों की हजारों चिट्ठियां मिलती हैं। भक्त किसी भी शुभ काम की शुरुआत में गणेशजी को चिट्ठी भेजकर आमंत्रित करते हैं।
1010
पुडुचेरी का विनायगर मंदिर
भारत के दक्षिण में पुडुचेरी में मनाकुला विनायगर मंदिर स्थित है। यहां मान्यता प्रचलित है कि सन् 1666 में यहां कुछ फ्रांसीसियों का एक दल आया था, मंदिर का इतिहास उससे भी पहले का है। मंदिर में चित्रों में गणेशजी से जुड़ी कथाएं अंकित की हुई हैं। मंदिर का मुख समुद्र की ओर है। इसीलिए, इसे भुवनेश्वर गणेश भी कहते हैं।
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi