Published : Jul 22, 2020, 06:14 PM ISTUpdated : Jul 23, 2020, 08:42 AM IST
पटना (Bihar)। उत्तर बिहार के जिलों में बाढ़ से स्थिति भयावह हो गई है। नदियों में उफान से सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। खाने के लिए कुछ नहीं बचा है। इसके चलते कई स्थानों पर लोग घोंघा खाने को मजबूर है। उधर, आंधी के कारण कई घर और पेड़ धराशाई हो गए हैं। पश्चिम चंपारण में गंडक का जलस्तर 4.40 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया है। उधर, कोसी भी उफान पर है।
बाढ़ के पानी से खेत में फसल तबाह हो चुके हैं। कई गांवों में बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। लोग हैरान-परेशान हैं कि अब क्या करें।
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छपरा में भी नेपाल से पानी आने की वजह से 40 गांव में बाढ़ आना शुरू हो चुका है। बताया जा रहा है कि पानी दबाव के चलते कई स्थानों पर तटबंध टूटा है।
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जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित किसी भी इलाके में सरकार और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
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बाढ़ के बीच लोगों के बीच पेट पालने की मुसीबत आ गई है। इस कठिन वक्त में लोग घोंघा खाने को मजबूर हैं।
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गरीब महिलाएं बाढ़ के पानी से घोंघा छानकर लाती हैं और उसका मीट निकालकर बेच रही हैं।
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लोगों का कहना है कि बाढ़ प्रभावितों तक प्रशासन राहत कार्य पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है। पटना के धनरुआ रोड पर काफी मात्रा में घोंघा लेकर बैठी महिलाएं इन दिनों देखी जा रही हैं।
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