Published : Jul 02, 2020, 12:10 PM ISTUpdated : Jul 02, 2020, 02:00 PM IST
बिजनेस डेस्क। देश के जाने-माने कारोबारी अनिल अंबानी इस वक्त जबरदस्त वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उनके सामने एक बार फिर जेल जाने और सपत्तियों की जब्ती का खतरा मंडरा रहा है। तीन चीनी बैंकों से लिए कर्ज के मामले में एक कोर्ट ने अंबानी को साफ-साफ डेडलाइन दे दी है। इससे पहले स्वीडन की कंपनी एरिक्सन के मामले में भी कर्ज न चुका पाने की वजह से अंबानी पर जेल जाने का खतरा था। मगर तब उनके बड़े भाई और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने करीब 550 करोड़ रुपये देकर मदद की थी।
अब अनिल पर फिर जेल जाने की नौबत आ गई है। लंदन की एक कोर्ट ने तीन चीनी बैंकों से जुड़े कर्ज के मामले की सुनवाई करते हुए अनिल अंबानी को 29 दिन की समय सीमा दी थी। मगर तय समय पर कर्ज नहीं चुकाया जा सका है। अब लंदन कोर्ट ने कहा है कि वो (अनिल) अगर कोर्ट के आदेश (कर्ज चुकाना) को नहीं मानते हैं तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है।
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मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक लंदन में हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी को आदेश दिया है कि वो 20 जुलाई तक अपनी सभी संपत्तियों, देनदारियों, आय और व्यय के विवरण दें। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर दी गई डेडलाइन को उन्होंने पूरा नहीं किया तो जेल की सजा के साथ उनकी सम्पत्तियों को सीज किया जा सकता।
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ये ऑर्डर 29 जून को चीनी बैंकों को 717 डॉलर (करीब 54 अरब 48 करोड़) कर्ज ना चुकाने पर लंदन की कमर्शियल कोर्ट ने जारी किया। मई में कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी की दलीलों को खारिज करते हुए जून तक कर्ज चुकाने का फैसला सुनाया था।
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ये मामला अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशन (RCom) द्वारा लिए गए 900 मिलियन डॉलर के कर्ज से जुड़ा है। RCom ने इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना लिमिटेड, चाइना डेवलपमेंट बैंक और एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना से कर्ज लिया है।
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कर्ज से जुड़े मामले में अनिल अंबानी की ओर से पिछले दिनों कोर्ट को बताया गया था कि ये कॉर्पोरेट कर्ज है और इसमें पर्सनल गारंटी नहीं दी गई है। अंबानी ने किसी भी पर्सनल गारंटी से संबन्धित कागजात पर दस्तखत भी नहीं किए हैं।
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अनिल अंबानी कभी दुनिया के टॉप 6 सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल थे। चीनी बैंकों से कर्ज के मामले में उन्होंने इसी साल कोर्ट को बताया था कि वो दिवालिया हो चुके हैं और उनकी नेटवर्थ जीरो है।
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अनिल अंबानी की कंपनी पिछले साल डिफ़ाल्ट हो चुकी है। चीनी बैंकों के अलावा भारतीय बैंकों का भी कर्ज है। पिछले दिनों देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने इस मामले में ट्रिब्यूनल में मामला दर्ज कराकर दिवालिया प्रक्रिया के तहत कर्ज वसूली की मांग की है।
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