भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल हाल में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुई हैं। हरियाणा के एक छोटे से गांव में जन्मी रानी का बचपन कच्चे घर में गुजरा है, उन्होंने गरीबी झेली है और रिश्तेदारों और समाज के ताने भी। घर चलाने के लिए उनके पिता तांगा चलाते थे और ईंटें बेचते थे। तेज़ बारिश के दिनों में उनके कच्चे घर में पानी भर जाता था।
रानी ने बताया, जब उन्होंने हॉकी खेलने की इच्छा ज़ाहिर की, तो माता-पिता और रिश्तेदारों ने साथ नहीं दिया। रिश्तेदार भी पिता को ताने देकर कहते थे, ‘ये हॉकी खेल कर क्या करेगी? बस छोटी-छोटी स्कर्ट पहन कर मैदान में दौड़ेगी और घर की इज्ज़त ख़राब करेगी।’” उस समय ये सब सुनकर रानी डरती थीं कि कभी हॉकी नहीं खेल पाएंगी। आज वही लोग रान की पीठ थपथपाते हैं और उनके घर लौटने पर ख़ासतौर से बधाई देने आते हैं।