NCERT की बैन किताब से कितना होगा नुकसान? जानिए एक टेक्स्टबुक छापने में कितना आता है खर्च
NCERT Book Printing Cost: NCERT क्लास 8 की विवादित किताब पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद लाखों कॉपियां वापस ली जा रही हैं। जानिए एक किताब छापने में कितना खर्च आता है और अब उनका क्या होगा।

आखिर NCERT की क्लास 8 की किताब पर बैन क्यों लगा?
Supreme Court of India ने क्लास 8 की सोशल साइंस किताब के उस हिस्से पर सख्ती दिखाई, जिसमें “ज्यूडिशरी में करप्शन” का जिक्र था। चीफ जस्टिस सूर्यकान्त की बेंच ने इस पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट के आदेश के बाद किताब की छपाई, बिक्री और डिजिटल शेयरिंग पर रोक लगा दी गई। मामला सामने आते ही शिक्षा मंत्रालय और NCERT ने तुरंत एक्शन लिया।
क्या अब बाजार में यह किताब मिल पाएगी?
नहीं। सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि विवादित किताब की बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन तुरंत रोका जाए। जो कॉपियां गोदाम या दुकानों तक पहुंची थीं, उन्हें वापस मंगाया जा रहा है। छात्रों तक नई सप्लाई फिलहाल रोक दी गई है ताकि आगे कोई विवाद न हो।
पहले से छपी लाखों किताबों का क्या होगा?
करीब 2.25 लाख कॉपियां छप चुकी थीं। इनमें से बहुत कम बिक पाईं। अब ज्यादातर स्टॉक वापस लिया जा रहा है। जो कॉपियां सर्कुलेशन में हैं, उन्हें भी ट्रैक किया जा रहा है। आमतौर पर ऐसे मामलों में पुरानी किताबें या तो नष्ट की जाती हैं या पूरी तरह बदल दी जाती हैं।
क्या विवादित चैप्टर दोबारा लिखा जाएगा?
हां। NCERT ने कहा है कि क्लास 8 की सोशल साइंस किताब के विवादित पूरे चैप्टर की दोबारा समीक्षा होगी। सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स और संबंधित अधिकारियों से सलाह लेकर नया वर्जन तैयार किया जाएगा। उम्मीद है कि संशोधित किताब 2026-27 सत्र से लागू की जाएगी।
NCERT क्लास 8 बैन किताब की डिजिटल वर्जन का क्या हुआ?
सिर्फ प्रिंट ही नहीं, ऑनलाइन पीडीएफ और ई-बुक वर्जन भी हटाए जा रहे हैं। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि आधिकारिक प्लेटफॉर्म से विवादित कंटेंट तुरंत हटाया जाए ताकि वह आगे शेयर न हो।
NCERT की एक किताब छापने में कितना खर्च, जानिए कितने का नुकसान?
NCERT की किताबें मुनाफे के लिए नहीं छपतीं। करीब 300 पेज की एक किताब की प्रिंटिंग लागत लगभग 90 रुपए से 100 रुपए प्रति कॉपी मानी जाती है। रिटेल कीमत आमतौर पर 125 रुपए से 230 रुपए के बीच होती है। अब इतनी बड़ी संख्या में किताबें वापस लेने से प्रिंटिंग, स्टोरेज और लॉजिस्टिक का खर्च भी बड़ा मुद्दा बन गया है। कुल 2.25 लाख कॉपियां छपीं है। अगर प्रति किताब खर्च 100 रुपए मानें, तो लगभग 2.25 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
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