UK Job Market Struggle: लंदन में 1000 जॉब एप्लिकेशन के बाद भी काम न मिलने पर एक ब्रिटिश युवक ने ऑस्ट्रिया के 400 आबादी वाले गांव का रुख किया। जानिए UK जॉब मार्केट की कड़ी प्रतिस्पर्धा की कहानी। फिर कैसे बदली युवक की किस्मत।

London Data Analytics Jobs: आज के समय में बड़े शहरों में नौकरी पाना कितना मुश्किल हो गया है, इसकी मिसाल है 29 साल के टेमर जेकी की कहानी। लंदन में डेटा एनालिटिक्स की नौकरी पाने के लिए उन्होंने 1,000 जगह आवेदन किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। swns.com की स्टोरी के अनुसार आखिरकार उन्होंने यूके छोड़कर ऑस्ट्रिया के एक छोटे से गांव में नई शुरुआत की और वहीं कुछ हफ्तों में नौकरी भी मिल गई।

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लंदन में डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते थे टेमर

टेमर लंदन में डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तीन महीने का कोर्स भी किया। कोर्स खत्म होते ही उन्होंने एक-एक कर करीब 1,000 नौकरियों में आवेदन कर दिया। लेकिन नतीजा चौंकाने वाला था। इतने आवेदन में सिर्फ चार इंटरव्यू कॉल आए। कई कंपनियों में एक पद के लिए 5,000 तक उम्मीदवार थे। इतनी बड़ी प्रतिस्पर्धा में नए उम्मीदवार के लिए जगह बनाना बेहद मुश्किल साबित हुआ।

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गर्लफ्रेंड को तीन हफ्तों में मिल गई नौकरी

इसी दौरान उनकी गर्लफ्रेंड एना हैसेलबोएक ऑस्ट्रिया में नौकरी ढूंढ रही थीं। वहां हालात बिल्कुल उलट थे। सिर्फ तीन हफ्तों में उन्हें तीन इंटरव्यू मिले और एक जॉब ऑफर भी। बातचीत के दौरान एना ने अपने फैमिली डेंटिस्ट को अपनी और टेमर की जॉब सर्च के बारे में बताया। डेंटिस्ट ने कहा कि उनके हेल्थ सेंटर में विस्तार हो रहा है और दोनों के लिए काम हो सकता है। यहीं से टेमर की जिंदगी ने नया मोड़ लिया।

400 आबादी वाला गांव बना टेमर के लिए नया ठिकाना

अप्रैल 2025 में टेमर ऑस्ट्रिया के लोअर ऑस्ट्रिया क्षेत्र के एक छोटे से कस्बे में शिफ्ट हो गए। इस जगह की आबादी सिर्फ 400 है। पूरे गांव में एक सड़क और एक रेस्टोरेंट है, जिसे एना के माता-पिता चलाते हैं। अब टेमर हेल्थ सेंटर में डिजिटल ऑर्थोडॉन्टिक टेक्नीशियन के तौर पर काम कर रहे हैं, जबकि एना वहीं ऑफिस मैनेजर हैं।

खर्च आधा, सुकून दोगुना

लंदन में जहां एक बेडरूम फ्लैट के लिए 1,300 पाउंड तक किराया देना पड़ रहा था, वहीं यहां तीन बेडरूम का अपार्टमेंट 800 पाउंड में मिल रहा है। किराने का साप्ताहिक खर्च भी 100 पाउंड से घटकर 50 पाउंड रह गया है। कम खर्च की वजह से दोनों अब अच्छी-खासी बचत कर पा रहे हैं। टेमर कहते हैं कि उन्हें यहां की शांति, साफ हवा और सादा जीवन पसंद है। हालांकि गांव की शांति के साथ एक सच्चाई भी जुड़ी है अकेलापन। टेमर बताते हैं कि कई बार जब वे बाहर टहलने निकलते हैं तो आसपास कोई दिखाई तक नहीं देता। उन्हें अपने परिवार और पालतू बिल्ली की याद आती है। खासकर अपनी बहन के बच्चों के साथ समय न बिता पाने का मलाल रहता है।

भाषा बनी चुनौती

ऑस्ट्रिया में आकर सबसे बड़ी दिक्कत भाषा की रही। टेमर ने चार-पांच महीने जर्मन सीखने की कोशिश की, लेकिन अभी भी वे पूरी तरह सहज नहीं हैं। कई बार उन्हें सहकर्मियों से बात करने के लिए इशारों का सहारा लेना पड़ता है।

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ब्रेक्जिट के बाद बदला फैसला

पहले योजना थी कि एना लंदन शिफ्ट होंगी, लेकिन ब्रेक्जिट के बाद वीजा नियम सख्त हो गए। इसके उलट, टेमर के लिए ऑस्ट्रिया में वीजा लेना आसान रहा, क्योंकि उनके पास पहले से नौकरी का ऑफर था। अब दोनों अपने इस फैसले से खुश हैं और टेमर आगे चलकर वीजा बढ़ाने की तैयारी में हैं।

बड़ी सीख: मौका हमेशा बड़े शहर में ही नहीं मिलता

टेमर की कहानी एक बड़ा सवाल उठाती है कि क्या सफलता सिर्फ बड़े शहरों में ही मिलती है? कभी-कभी छोटी जगहें भी बड़े मौके दे देती हैं। जहां एक ओर लंदन में हजारों लोगों के बीच पहचान बनाना मुश्किल था, वहीं 400 लोगों के गांव ने उन्हें काम, सुकून और स्थिरता तीनों दे दिए। यह कहानी बताती है कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए, तो जिंदगी दूसरा रास्ता जरूर खोल देती है।