कर्नाटक के एक सरकारी गर्ल्स कॉलेज में शानदार नतीजों के कारण एडमिशन की होड़ है। इस साल 565 छात्राओं ने दाखिला लिया है, लेकिन कॉलेज सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। यहाँ 565 लड़कियों के लिए सिर्फ 4 टॉयलेट और 6 क्लासरूम हैं।

हुविनाहडगली (कर्नाटक): एक तरफ जहां सरकारी कॉलेजों से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है, वहीं कर्नाटक का एक सरकारी गर्ल्स कॉलेज ऐसा भी है जहां एडमिशन के लिए लाइन लगी है। ये कहानी है विजयनगर के हुविनाहडगली में मौजूद श्रीमती सोप्पिना कालम्मा गवर्नमेंट गर्ल्स प्री-ग्रेजुएट कॉलेज (SKG Govt PU College) की। यहां एडमिशन के लिए छात्राएं दूर-दूर से आ रही हैं और इस साल 565 लड़कियों ने दाखिला लिया है।

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शानदार रिजल्ट, लेकिन टॉयलेट के लिए लगती है लाइन

इस सरकारी कॉलेज ने पिछले साल पीयू परीक्षा (12वीं बोर्ड) में 77% का शानदार रिजल्ट देकर प्राइवेट कॉलेजों को भी पीछे छोड़ दिया। कॉमर्स में 94%, साइंस में 81।2% और आर्ट्स में 67% छात्राएं पास हुईं। इतना ही नहीं, 12 छात्राओं ने कन्नड़ में 100 में से 100 नंबर हासिल किए। पिछले 5 सालों से यहां एडमिशन लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

एडमिशन के लिए लगी है होड़

इस साल फर्स्ट ईयर पीयू (11वीं) में 320 और सेकेंड ईयर पीयू (12वीं) में 245 समेत कुल 565 छात्राओं ने एडमिशन लिया है। कॉलेज के बेहतरीन नतीजों की वजह से कोप्पल, मुंडरगी, संदूर, रानीबेन्नूर, शिरहट्टी, हगरीबोम्मनहल्ली और हरपनहल्ली जैसे आस-पास के तालुकों से भी छात्राएं यहां पढ़ने आ रही हैं।

लेकिन इस कामयाबी के पीछे एक कड़वी सच्चाई भी है। कॉलेज में सुविधाओं की भारी कमी है। 565 छात्राओं के लिए सिर्फ 4 टॉयलेट हैं, जो एक ही कमरे में बने हैं। लड़कियों को टॉयलेट जाने के लिए लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ता है। यहां तक कि महिला और पुरुष लेक्चरर्स के लिए भी अलग से कोई टॉयलेट नहीं है।

पढ़ाई के लिए भी सिर्फ 6 कमरे हैं। जिस क्लासरूम में 80 छात्राओं के बैठने की क्षमता है, वहां 150 से ज्यादा छात्राएं किसी तरह एडजस्ट करके बैठती हैं। कॉलेज में 16 लेक्चरर हैं, जिनमें से 6 गेस्ट लेक्चरर हैं। प्रिंसिपल का पद भी खाली है। यहां आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस, एजुकेशन और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई होती है।

हालांकि, स्थानीय विधायक कृष्णा नाइक ने कॉलेज के विकास पर ध्यान दिया है। उन्होंने अपने फंड से फर्नीचर, एयर-कंडीशन्ड कंप्यूटर लैब, साइंस लैब और बैठने की व्यवस्था करवाई है। लेकिन कॉलेज का खेल का मैदान अभी भी अधूरा है।

कॉलेज को अभी भी कम से कम 6 और क्लासरूम, एक हाई-टेक टॉयलेट कॉम्प्लेक्स और एक ऑडिटोरियम की सख्त जरूरत है। बारिश के दिनों में तो हालत और भी खराब हो जाती है। पानी निकलने की कोई व्यवस्था न होने के कारण पूरा कैंपस तालाब जैसा बन जाता है।

कॉलेज के इंचार्ज प्रिंसिपल ए। कोट्रगौडा का कहना है, "अच्छे रिजल्ट की वजह से एडमिशन के लिए भीड़ है। हमारे पास 565 छात्राएं हैं, लेकिन कमरों और टॉयलेट की बहुत कमी है। हमने इस बारे में विधायक जी को जानकारी दी है।"