बर्तन में बैठकर गर्भवती ने पार की उफनती नदी..फिर दर्द से कराहते हुए हॉस्पिटल तक पहुंची, लेकिन मिली बुरी खबर

Published : Jul 22, 2020, 12:16 PM ISTUpdated : Jul 22, 2020, 12:25 PM IST

बीजापुर, छत्तीसगढ़. ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं का आज भी बुरा हाल है। दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवा मिलना सपने देखने जैसा है। वहीं, सरकारी अस्पतालों की हालत भी बुरी है। न इलाज का इंतजाम है और न ही स्टाफ ठीक। यह तस्वीर यही कहानी कहती है। यह मामला 13 जुलाई का है। लेकिन तस्वीर सोशल मीडिया पर अब वायरल हुई है। बीजापुर जिले के मिनकापल्ली निवासी हरीश यालम की पत्नी लक्ष्मी को प्रसव पीड़ा होने पर 4 लोग बर्तन में बैठाकर चिंतावागु नदी पार कराकर पहले गोरला लाया गया। वहां से भोपालपट्टनम हॉस्पिटल लेकर आए। लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने पर बच्चे ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया। इस मामले की शिकायत की गई है। गर्भवती इन दिनों अपने मायके मीनुर में थी। परिजनों का कहना है कि नर्स ने समय पर प्रसव नहीं कराया। इससे बच्चे की जान चली गई। आगे पढ़िए इसी खबर के बारे में...

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बर्तन में बैठकर गर्भवती ने पार की उफनती नदी..फिर दर्द से कराहते हुए हॉस्पिटल तक पहुंची, लेकिन मिली बुरी खबर

परिजनों का कहना है कि जब गर्भवती को हॉस्पिटल लाया गया, तब नर्स ने जच्चा-बच्चा के ठीक होने की बात कही थी। लेकिन रात में बच्चे के गर्भ में मरने की खबर सुना दी। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ.रामटेके ने कहा कि परिजनों ने डॉ. गोपी किशन और नर्स के खिलाफ शिकायत की है। उन्हें शो-काज नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। आगे पढ़ें 28 किमी पैदल चली गर्भवती और फिर नवजात को लेकर इसी तरह लौटी...

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गढ़चिरौली, महाराष्ट्र. यह मामला भामरागढ़ तहसील में पिछले दिनों सामने आया था। इस महिला का नाम है रोशनी। इसके गांव में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। जब इसे प्रसव पीड़ा हुई, तो 6 जुलाई को यह एक आशाकर्मी के साथ 28 किमी दूर लाहिरी हॉस्पिटल पहुंची। वहां से उसे हेमलकसा स्थित लोक बिरादरी अस्पताल पहुंचा गया। यहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। यहां से भी यह महिला अपनी बच्ची को गोद में लेकर पैदल ही गांव लौटी। आगे पढ़िए ऐसी ही कुछ अन्य घटनाएं...

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कोंडागांव, छत्तीसगढ़. यह तस्वीर पिछले दिनों सामने आई थी। बल्लियों के सहारे बनाई गई पालकी पर लटकाकर इस गर्भवती को किमी दूर खड़ी एम्बुलेंस तक लाया गया। क्योंकि गांव तक रास्ता इतना ऊबड़-खाबड़ था कि एम्बुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकती थी। यह अच्छी बात रही कि एम्बुलेंस का ड्राइवर और नर्स अच्छे लोग निकले और उन्होंने गर्भवती को लाने के लिए यह रास्ता निकाला। मामला कोंडागांव माकड़ी विकासखंड के मोहन बेडा गांव का है। आगे पढ़िए..ऐसी ही कुछ अन्य घटनाएं..जो सरकारी खामियों या महिलाओं की परेशानी को दिखाती हैं..
 

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यह मामला छत्तीसगढ़ के कांकेर में पिछले दिनों सामने आया था। 12 साल की यह लड़की मानकी कांकेर जिले की ग्राम पंचायत कंदाड़ी के आश्रित गांव आलदंड की रहने वाली है। उसके गांव में कोई स्वास्थ्य सेवा नहीं है। लिहाजा, मजबूरी में मानकी को परिजन उसे कंधों पर टांगकर इलाज के लिए लेकर गए। करीब 5 किमी उसे ऐसे ही लटकाकर नदी तक ले गए। वहां, उन्हें घंटेभर तक नाव का इंतजार करना पड़ा। नदी पार करके 6 किमी दूर छोटेबेठिया उपस्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उनके गांव से उपस्वास्थ्य केंद्र की दूरी करीब 14 किमी है। इसके बाद उसे इलाज मिल सका। आगे पढ़िए...खटिया को 'एम्बुलेंस' बनाया

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यह शर्मनाक तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम से सामने आई थी। यह मामला बिशुनपुर प्रखंड के गढ़ा हाडुप गांव का है। यहां रहने वाले बलदेव ब्रिजिया के पत्नी ललिता को प्रसव पीड़ा हुई। उस हॉस्पिटल तक ले जाने का जब कोई दूसरा साधन नहीं दिखा, तो खटिया को लोगों ने 'एम्बुलेंस' बना लिया। 

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