रायपुर, छत्तीसगढ़. ऐसे दृश्य बेशक अब देखने को नहीं मिल रहे, लेकिन ये तस्वीरें कई पीढ़ियों तक लोगों के किस्सों में शामिल रहेंगी। लॉकडाउन में काम-काज बंद होने से भूखों मरने की नौबत आने पर अपने-अपने गावों की ओर भागते प्रवासी मजदूरों ने अपनी जिंदगी तक दांव पर लगा दी थी। ट्रकों पर लोग यूं सवार हुए, मानों वे कोई सामान हों। बच्चों को ऐसे लटकाकर ट्रकों पर फेंका गया, जैसे वो कोई खिलौना हों। उल्लेखनीय है कि पूरे देश में छत्तीसगढ़, बिहार, यूपी, झारखंड आदि राज्यों के सबसे ज्यादा मजदूर काम करते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते जब 25 मार्च को लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि आगे जिंदगी और भी कठिन हो जाएगी। बता दें कि छत्तीसगढ़ में लाखों मजदूर वापस लौटे हैं। जबकि यहां संक्रमण की दर बहुत कम है। यहां अब तक 668 के आसपास ही संक्रमित मिले हैं। देश में यह आंकड़ा 2.27 लाख को पार कर चुका है। बता दें कि लॉकडाउन 4 चरणों में 68 दिन रहा यानी 30 जून तक रहा। अब सरकार ने लॉकडाउन 5.0 की गाइडलाइंस जारी की है। यानी अब तीन चरणों में लॉकडाउन खोलने का प्लान है। तस्वीरें में देखिए ट्रकों पर सवार जिंदगी की भागमभाग..
महिलाओं ने नहीं सोचा था कि उन्हें कभी ऐसा करना पड़ेगा।
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एक ट्रक में जानवरों की तरह सवारी।
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ट्रकों में किसी कैदी की तरह बैठना पड़ा।
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एक ट्रक पर ठसाठस बैठे लोग।
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ट्रक पर चढ़ने की जद्दोजहद।
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ट्रकों में कैदियों की तरह झांकते लोग।
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