नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में 8 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने है। सभी पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। आम आदमी पार्टी ने बाबरपुर असेंबली सीट से गोपाल राय को मैदान में उतारा है। बात अगर गोपाल राय की करें तो वो फिलहाल आम आदमी पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में गिने जाते हैं। अन्य आम आदमी पार्टी के नेताओं से अलग गोपाल राय ने कॉलेज से ही राजनीति शुरू कर दी थी। उन्होंने एक सितंबर से तीन अक्टूबर 2019 के बीच 70 जन संवाद यात्रा किये थे, जो एक रिकॉर्ड ही है। आज हम आपको इनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ अहम बातें बताने जा रहे हैं।
10 मई 1975 को जन्में दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय अपने कॉलेज जीवन से ही राजनीति में सक्रीय हो गए थे।
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1999 में एक छात्र प्रदर्शन के दौरान उन्हें गोली लग गई थी। इसके बाद उनके गर्दन से नीचे के हिस्से में लकवा मार गया था।
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गोली उनके गर्दन के नीचे फंस गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे वो उनकी रीढ़ की हड्डी के पास पहुंच गई थी। तीन साल बाद जाकर वो चल पाए थे।
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इस हमले के 17 साल तक गोली उनके गर्दन में अटकी थी।
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2016 में एक जटिल सर्जरी के जरिये उनकी बॉडी से इस गोली को बाहर निकाला गया।
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आम आदमी पार्टी के नेताओं में गोपाल राय को सशक्त वक्ता के रूप में जाना जाता है। 2013 में अन्ना हजारे की भूख हड़ताल में गोपाल राय ने एक्टिव पार्टिसिपेशन किया था।
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लेकिन इस दौरान उनकी आर्मी चीफ वीके सिंह से कहासुनी हो गई, जिसके बाद गोपाल राय को मैदान से जाने को कह दिया गया।
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बाबरपुर सीट पर 1993, 1998, 2008 और 2009 में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। 2003 में इस सीट से कांग्रेस के विनय शर्मा ने जीत हासिल की थी। लेकिन 2013 के बाद इस सीट पर आम आदमी पार्टी का ही कब्ज़ा है।
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अब देखना है कि इस साल गोपाल राय अपनी सीट बचा पाते हैं या नहीं।
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