रांची में केजी कक्षा की एक बच्ची के नाले में बह जाने का दर्दनाक मामला सामने आया है। मासूम सहेलियों के साथ ट्यूशन जा रही थी। करीब साढ़े तीन घंटे बाद मासूम की लाश नदी से बरामद हो सकी।
रांची. नगर निगम की लापरवाही से एक मासूम बच्ची की जान चली गई। 5 साल की फलक अख्तर केजी में पढ़ती थी। बुधवार की दोपहर वो अपनी सहेलियों के साथ ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। हिंदपीढ़ी के नाला रोड पर खुले नाले से गुजरते समय अचानक उसका पैर फिसल गया। इससे पहले कि कोई कुछ कर पाता, बच्ची तेज बहाव के साथ बहती चली गई। बच्ची नाले में बहते हुए रेडिशन ब्लू के पास हरमू नदी में पहुंच गई। वहां से नामकुम में स्वर्णरेखा नदी में समा गई। घटना की जानकारी लगने पर बच्ची के परिजन और आसपास पड़ौस के लोग नाले के किनारे-किनारे बच्ची को रोते-बिलखते ढूंढते रहे। करीब साढ़े तीन घंटे की खोजबीन के बाद शाम साढ़े चार बजे नदी में बच्ची की लाश मिली। जहां बच्ची मिली, उसकी दूरी घटनास्थल से करीब 8 किमी है।
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फलक हिंदपीढ़ी के केबी एकेडमी में पढ़ती थी। पिता सद्दाम ऑटो चालक हैं। उसकी मां पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रहती हैं। फलक यहां नाला रोड पर अपनी नानी के साथ रहती थी। बताते हैं कि जैस ही फलक नाले में गिरी, उसकी सहेलियों ने मदद के लिए रोना-चिल्लाना शुरू कर दिया था। आसपास मौजूद लोगों ने बच्ची को बहुत ढूंढ़ने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। लोगों ने जेसीबी भी मंगाई। इसके बाद पुलिस ने राष्ट्रीय आपदा राहत बल(NDRF)को बुलवाया। हालांकि बच्ची तब तक अपनी जिंदगी हार चुकी थी। घटना को लेकर लोगों में काफी रोष दिखाई दिया। लोगों ने नालों की लापरवाही को लेकर जांच कराने की मां की। साथ ही पीड़ित के परिजनों को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग भी उठाई। उधर, नगरीय विकास मंत्री सीपी सिंह ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
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