छतरपुर : मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के छतरपुर (Chhatarpur) में सिस्टम की बेरहमी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो पूरी व्यवस्था पर ही सवाल उठा रही है। यहां चार साल की बच्ची के बाद जिला अस्पताल प्रबंधन ने शव वाहन देने से इनकार कर दिया। बेबस बाप चोरी छिपे बस से शव को किसी तरह बक्सवाहा तक ले आया। रास्ते भर दादा-दादी, चाचा और पिता मुंह छिपाते रहे लेकिन गांव से पांच किलोमीटर दूर से उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिली। लाचार परिवार कंधे पर बच्ची का शव लेकर कड़ी धूप में निकल पड़े। कभी मासूम बेटी के शव के पिता लेकर चलता तो कभी चाचा। इस दौरान की जो तस्वीरें सामने आई वो रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं...
तीन दिन पुराने मामले का वीडियो और तस्वीरें सामने आईं तो हड़कंप मच गया। जानकारी के मुताबिक तीन दिन पहले चार साल की राधा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पिता बेटी को लेकर बक्सवाहा के एक डॉक्टर के पास पहुंचे। वहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टर ने दमोह के एक निजी चिकित्सक के पास भेज दिया। जब पिता बेटी को लेकर वहां पहुंचा तो डॉक्टर ने इलाज से इनकार कर दिया।
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इसके बाद परिजन मासूम को लेकर दमोह जिला अस्पताल पहुंचे। वहां, जांच के बाद डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। चूंकि मौत संदिग्ध थी तो डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम कराने को कहा। इससे घबराकर पिता और चाचा मासूम के शव को लेकर अस्पताल से बाहर निकल आए। उन्होंने शव ले जाने वाहन की मांग की लेकिन उन्हें नहीं मिला।
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बच्ची के दादा-दादी मासूम का शव लेकर बिलख-बिलख कर रो रहे थे। किसी तरह उसे लेकर अस्पताल के सामने मानस भवन परिसर पहुंचे। वे शव को लेकर दर-दर की ठोकरें खाते रहे लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इसके बाद बच्ची के चाचा ने बक्सवाहा नगर पंचायत में गुहार लगाई लेकिन जिम्मेदार शव वाहन देने की बजाया आश्वासन देते रहे।
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मासूम के दादा-दादी ने बताया कि राधा की मौत के बाद डॉक्टर पोस्टमार्टम कराना चाहते थे लेकिन हमारे पास पैसे नहीं थे। लोगों के कहने के बाद हमने नातिन के शव को कंबल में लपेटा और चोरी-छिपे बस से बक्सवाहा पहुंच गए। लेकिन उन्हें वहां भी नगर पंचायत परिषद से किसी भी तरह की मदद नहीं मिली। जिसके बाद पिता-चाचा को कंधा बदल-बदल कर शव को लेकर गांव की तरफ पैदल ही निकलना पड़ा।
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चाचा और पिता बेटी के शव को गले से चिपकाकर गांव की ओर सड़क पर चल रहे थे। इसी दौरान किसी ने उनका वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। इसके बाद जैसे ही इसकी जानकारी एसडीएम को लगी तो उन्होंने गांव से चंद कदम दूरी पर एक शव वाहन भेजा। जिसके बाद परिजन शव वाहन में लेकर उसे गांव पहुंचे।
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