बेमिसाल: एक चाय वाले की बेटी ने फ्लाइंग ऑफिसर बन रचा इतिहास, जिद के लिए छोड़ चुकी है 2 सरकारी नौकरी

Published : Jun 22, 2020, 09:35 AM ISTUpdated : Jun 22, 2020, 12:12 PM IST

नीमच (मध्य प्रदेश). कहते हैं कि सपनों में ही एक ऐसी ताकत छुपी होती है जो हमें उन बुलंदियों को छूने में हमारी मदद करती है। कुछ ऐसी ही प्रेरणा पाकर आकाश को छूने के सपने को साकार किया है मध्य प्रदेश के एक चाय बेचने वाले की बेटी आंचल गंगवाल ने। जिसकी कामयाबी की तारीफ आज पूरा देश कर रहा है, तो आइए जानते हैं कई मुश्किलों का सामना करते हुए आंचल ने किस तरह यह सफलता प्राप्त की है।  

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बेमिसाल: एक चाय वाले की बेटी ने फ्लाइंग ऑफिसर बन रचा इतिहास, जिद के लिए छोड़ चुकी है 2 सरकारी नौकरी

दरअसल, नीमच शहर की रहने वाली आंचल गंगवाल वायुसेना में फाइटर जेट पायलट बन गई है। अब चाय बेचने वाली की यह बेटी फाइटर प्लेन उड़ाएगी।
शनिवार को हैदराबाद में आयोजित दीक्षांत समारोह में उनका सम्मान हुआ। जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने देश सेवा के लिए उन्हें समर्पित किया।

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जब आंचल से उनकी सफलता के बारे में मीडिया ने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 2013 में बाढ़ के दौरान भारतीय वायुसेना ने जिस तरह से बचाव अभियान को अंजाम दिया था, उसी से उसे प्रेरणा मिली है।
 

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बता दें कि आंचल के पिता सुरेश गंगवाल ने चाय बेच कर ही अपने 3 बच्चों को पढ़ाया है। सुरेश का बड़ा बेटा इंजीनियर है। दूसरी बेटी आंचल फ्लाइंग अफसर है, तो सबसे छोटी बेटी बी कॉम कर रही है।
 

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 आंचल के जानने वालों का कहना है कि वह  शुरू से ही मेहनती थी, उसको पहले एमपी में पुलिस सब इंस्पेक्टर की नौकरी मिली थी, कुछ दिन बाद वह नौकरी छोड़ दी। फिर आंचल का चयन लेबर इंसपेक्टर के पग पर हुआ। वह भी छोड़ दी, क्योंकि उसका लक्षय था, उसे फोर्स में जाना है। 

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आंचल के पिता नम आंखों से बोले-मेरी बेटिया ही मेरी असली पूंजी है, आज उसने मेरा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। उन्होंने बताया कि आंचल बचपन से ही पढ़ने में अच्छी थी। उसने हर  बोर्ड परीक्षा में 92% से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

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20 जून को जब हैदराबाद वायु सेना अकादमी में  ग्रेजुएशन परेड आयोजित किया था। तो इस पासिंग आउड परेड को टीवी पर टकीटकी लगा कर नीमच में बैठे आंचल के पिता सुरेश गंगवाल और उनका पूरा परिवार देख रहा था। उनकी बिटिया आंचल गंगवाल इस परेड में मार्च पास्ट कर रही थी। जैसी ही आंचल को राष्ट्रपति पट्टिका से सम्मानित किया गया तो पिता की आंखें छलक आईं। बता दें कि सुरेश आज भी नीमच बस स्टैंड के पास चाय बेचते हैं।

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खुशी के पल में अपने माता-पिता के साथ आंचल।

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बता दें कि आंचल की इस कामयाबी के बाद से बधाई देने वालों का उनके घर तांता लगने लगा है।

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